पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का आचरण निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने सदन की घटती कार्यवाही, संसदीय अनुशासन और युवा सदस्यों को अवसर देने पर जोर दिया।

लखनऊ। अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, लेकिन उनका आचरण दलगत राजनीति से ऊपर, पूरी तरह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखनी भी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

विधायिका जनता की आवाज़ को शासन तक पहुंचाने का माध्यम

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और समस्याएं शासन तक पहुंचती हैं और उनका समाधान होता है। उन्होंने चिंता जताई कि कई राज्यों में सदन की कार्यवाही का समय लगातार घट रहा है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सदन जितना अधिक चलेगा, चर्चा उतनी ही सार्थक होगी

श्री बिरला ने कहा कि सदन की कार्यवाही के लिए निश्चित और पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब सदन अधिक समय तक चलता है, तो चर्चा अधिक गंभीर, सार्थक और परिणामोन्मुख होती है, जिससे जनता के मुद्दों का बेहतर समाधान निकलता है।

सोशल मीडिया के दौर में संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन और जरूरी

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के इस दौर में जनप्रतिनिधियों के हर आचरण पर जनता की नजर रहती है। ऐसे समय में संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि जब हर ओर से सूचनाओं का प्रवाह हो रहा हो, तब सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करते हैं ऐसे सम्मेलन

श्री बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाते हैं। ये सम्मेलन आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हैं। साथ ही, देशभर में नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं में सामंजस्य स्थापित करने में भी मदद करते हैं।

नए और युवा सदस्यों को अवसर देना पीठासीन अधिकारियों का दायित्व

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि सदन में सभी सदस्यों को, विशेषकर नए और युवा सदस्यों को, पर्याप्त अवसर दिए जाएं। इससे विधानसभाएं और संसद जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच बनी रहेंगी।