उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले और पांच बार विधायक रह चुके कांग्रेसी नेता अजय राय इस वक्त च्रर्चा में। बताया जा रहा है कि वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं। वहीं कुछ लोगों कहना है कि वह कांग्रेस भी छोड़ सकते हैं। इसी बीच उनको मनाने के लिए राहुल गांधी ने उन्हें दिल्ली बुलाया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। इसी बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की राजनीतिक ताकत और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अजय राय वाराणसी और पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर वह कभी कांग्रेस से अलग होते हैं, तो पार्टी को कितना नुकसान हो सकता है? हालांकि, अजय राय ने कांग्रेस छोड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई है।

बीजेपी से कांग्रेस तक का सफर

  • अजय राय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी से की थी। वह 1996, 2002 और 2007 में कोलअसला विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 2012 में कांग्रेस का दामन थाम लिया। उसी साल वह वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट से विधायक बने।
  • अजय राय 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार रहे। हालांकि, तीनों चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पूर्वांचल में कितनी है अजय राय की ताकत?

  • अजय राय की राजनीति का प्रमुख केंद्र वाराणसी और आसपास का पूर्वांचल क्षेत्र रहा है। वह स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मौजूदगी और क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रियता के लिए पहचाने जाते हैं। पांच बार विधायक रहने का उनका अनुभव भी उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
  • हालांकि, किसी नेता का व्यक्तिगत प्रभाव कितना बड़ा है, इसका आकलन केवल उसके पुराने चुनावी रिकॉर्ड से नहीं किया जा सकता। इसके लिए मौजूदा जनसमर्थन, संगठन पर पकड़ और चुनावी नतीजों को भी देखना जरूरी है।

कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी को क्या होगा नुकसान?

अगर भविष्य में अजय राय कांग्रेस छोड़ते हैं, तो वाराणसी और पूर्वांचल में पार्टी के संगठन पर इसका असर पड़ सकता है। उनके साथ जुड़े कार्यकर्ताओं के रुख से भी स्थानीय राजनीति प्रभावित हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस को पूरे उत्तर प्रदेश में बड़ा नुकसान होना तय है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके साथ कितने कार्यकर्ता जाते हैं और पार्टी का स्थानीय संगठन कितना मजबूत रहता है।

प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद क्या बदला?

कांग्रेस ने हाल ही में अजय राय की जगह आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है। इसके बाद पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की खबरें भी सामने आईं। अजय राय ने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताई है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।