अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आतिशबाजी और पत्थर बरसाए। पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियां चलाईं।

अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन ने शनिवार को ऐसा हिंसक रूप ले लिया कि सड़कें कुछ देर के लिए किसी फिल्मी युद्ध के मैदान जैसी नजर आने लगीं। प्रदर्शनकारियों ने दंगा-रोधी पुलिस पर आतिशबाजी के रॉकेट दागे। देखते ही देखते सड़कें धुएं, आग और धमाकों से भर गईं। हालांकि, इस दृश्य में हैरी पॉटर की तरह कोई जादू नहीं था, बल्कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बढ़ता तनाव था।

पुलिस पर आतिशबाजी और पत्थरों की बौछार, सरकारी इमारत में आग

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर रॉकेट और अन्य आतिशबाजी फेंकी। Reuters के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर भी बरसाए और कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी। स्थिति बिगड़ने पर दंगा-रोधी पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाने के साथ दुकानों की खिड़कियां भी तोड़ीं। कुछ लोगों ने सड़क से पत्थर उखाड़कर उन्हें पुलिस पर फेंका।

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भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र

इन प्रदर्शनों की बड़ी वजह सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बताई जा रही है। छात्रों की अगुवाई में शुरू हुआ आंदोलन तिराना से निकलकर अल्बानिया के दूसरे शहरों तक पहुंच गया है।

प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में ट्यूशन फीस घटाना, शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ाना और शिक्षा क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार पर कार्रवाई शामिल है।

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आंदोलन की जड़ें पुराने प्रदर्शनों से जुड़ीं, यूरोप में भी गूंज

Reuters के अनुसार, मौजूदा अशांति की पृष्ठभूमि गर्मियों में हुए उन प्रदर्शनों से भी जुड़ी है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़े समुद्र तटीय लग्जरी प्रोजेक्ट के विरोध में हुए थे। उस समय प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे थे। अब छात्रों समेत कई समूह सरकार के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो चुके हैं। अल्बानिया में यह विरोध यूरोप के दूसरे देशों में चल रहे प्रदर्शनों की व्यापक तस्वीर से भी जुड़ता दिख रहा है, जहां भ्रष्टाचार, शिक्षा, महंगाई, पेंशन और आवास जैसे मुद्दों को लेकर लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।

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