Amarnath में सबसे ज्यादा खर्च कहां होता है? जानें यात्रा का पूरा बजट, कितना कैश साथ रखना चाहिए, UPI क्यों काम नहीं आ सकता और पहली बार जाने वालों के लिए जरूरी टिप्स

Amarnath Yatra Budget: हर साल की तरह इस बार भी बाबा बर्फानी के भक्तों में गजब का उत्साह है। अब तक 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। 57 दिन चलने वाली इस यात्रा की शुरुआज आज 3 जुलाई 2026 से हो गई है। अगर आप भी बाबा बर्फानी के दर्शन की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ रजिस्ट्रेशन और हेल्थ सर्टिफिकेट बनवा लेना काफी नहीं है। सबसे बड़ा सवाल आता है कि जेब में कितना पैसा होना चाहिए? फोन और UPI हर जगह काम नहीं आता, तो कितना कैश साथ रखना जरूरी है और यात्रा में सबसे ज्यादा पैसा कहां खर्च होता है? आइए जानते हैं पूरा बजट और खर्च ताकि आपकी यात्रा में कोई परेशानी न आए।

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अमरनाथ यात्रा कब से शुरू?

शुक्रवार, 3 जुलाई से यात्रा शुरू भी हो चुकी है। पहले ही दिन 4,822 श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम के बेस कैंप से रवाना हो गए। दूसरा जत्था कल शनिवार को सुबह रवाना होगा। इसमें 3,865 शामिल होंगे। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धालुओं के नाम एक खास चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने यात्रा को 'बहुत बड़ा सौभाग्य' बताते हुए कहा कि 'ये आस्था की यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित न रहे, बल्कि सफाई, सुरक्षा, स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरण बचाने के प्रति भी एक सामूहिक संकल्प बने।' पीएम मोदी ने अपने दो पेज के इस संदेश में 'हर हर महादेव' और 'जय बाबा बर्फानी' कहते हुए श्रद्धालुओं का अभिवादन किया, और इस यात्रा को भारत की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परंपरा की एक जीवंत मिसाल बताया।

अमरनाथ यात्रा में पैसा कहां-कहां जाता है?

1. रजिस्ट्रेशन का खर्च

यात्रा शुरू करने से पहले हर श्रद्धालु को श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) की वेबसाइट या अधिकृत बैंक शाखा से रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके लिए 150 रुपए की फीस देनी होती है, जिसके बाद यात्रा कार्ड (Yatra Card) मिलता है। ये खर्च छोटा है, लेकिन बिना इसके यात्रा शुरू ही नहीं हो सकती, तो इसे प्लान में सबसे पहले रखें।

2. आना-जाना

यही वो हिस्सा है जहां आपका बजट सबसे ज्यादा बदल सकता है, क्योंकि रास्ता तय करने के तीन तरीके हैं और तीनों की कीमत में जमीन-आसमान का फर्क है।

पैदल यात्रा

अगर आप शारीरिक रूप से फिट हैं और पैदल चलना चाहते हैं, तो ये सबसे सस्ता विकल्प है। इसमें सिर्फ खाने-ठहरने का खर्च आता है, रास्ते का कोई अलग किराया नहीं लगता है।

खच्चर, पालकी या पिट्ठू

जो लोग पैदल पूरा रास्ता तय नहीं कर सकते, वे खच्चर या पालकी का सहारा लेते हैं। खच्चर का किराया करीब 4,000 रुपए के आसपास पड़ता है, जबकि पालकी लेने पर ये खर्च बढ़कर करीब 8,000 रुपए तक पहुंच सकता है। ये रेट श्राइन बोर्ड ने खुद तय किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली न हो।

हेलीकॉप्टर

सबसे तेज लेकिन सबसे महंगा तरीका यही है। हेलीकॉप्टर सीधे गुफा तक नहीं जाता है। ये सिर्फ पंचतरणी तक छोड़ता है, वहां से आगे के करीब 6 किलोमीटर पैदल, खच्चर या पालकी से ही तय करने होते हैं। बालटाल से पंचतरणी का हेलीकॉप्टर किराया करीब 3,250 रुपए है, जबकि पहलगाम से पंचतरणी का किराया इससे ज्यादा, करीब 4,900 रुपए पड़ता है। इसके अलावा पंचतरणी से गुफा तक की आखिरी दूरी के लिए भी अलग से करीब 3,250 रुपए और चुकाने होते हैं। यानी सिर्फ आने-जाने में ही आपका आधे से ज्यादा बजट खर्च हो सकता है, अगर आप हेलीकॉप्टर वाला रास्ता चुनते हैं।

3. लोकल ट्रैवल

बेस कैंप तक पहुंचने के लिए श्रीनगर, जम्मू, बालटाल और पहलगाम रूट पर बस और शेयर टैक्सी चलती हैं और प्रशासन ने इनका किराया भी फिक्स कर दिया है, ताकि यात्रियों से ओवरचार्जिंग न हो। स्थानीय ऑटो के लिए भी रेट तय है। पहले एक किलोमीटर के लिए करीब 26 रुपए, उसके बाद हर किलोमीटर पर 20 रुपए। तो अगर बेस कैंप के आसपास घूमना-फिरना है, इस खर्च को भी बजट में जोड़ लीजिए।

4. खाना और ठहरना

अच्छी खबर ये है कि रास्ते में जगह-जगह मुफ्त लंगर चलते हैं, जहां श्रद्धालुओं को खाना मिल जाता है। इससे खाने का खर्च काफी हद तक बच जाता है। ठहरने के लिए भी बेस कैंप और रास्ते में टेंट और शेल्टर की व्यवस्था होती है, जिसका किराया तय रेट पर मिलता है। अगर आप ज्यादा आराम चाहते हैं और होटल या बेहतर कैंप में रुकना चाहते हैं, तो ये खर्च अलग से जुड़ेगा।

अमरनाथ यात्रा में कितना बजट रखें?

अगर आप पूरी यात्रा पैदल करते हैं और लंगर और बेसिक टेंट में ठहरते हैं, तो प्रति व्यक्ति खर्च करीब 10,000 से 15,000 रुपए के बीच आ सकता है। अगर पालकी, खच्चर या ठहरने में थोड़ा आराम चुनते हैं, तो ये खर्च 15,000 से 25,000 रुपए तक जा सकता है और अगर हेलीकॉप्टर से पूरी यात्रा करते हैं, तो ये आंकड़ा 25,000 से 45,000 रुपए तक पहुंच सकता है। यानी बजट पूरी तरह आपके चुने हुए साधन पर निर्भर करता है।

अमरनाथ यात्रा में कैश ले जाना चाहिए या नहीं?

अमरनाथ का रास्ता ऊंचे पहाड़ी इलाके से होकर गुजरता है, जहां नेटवर्क की स्थिति शहरों जैसी बिल्कुल नहीं है। इस पहाड़ी इलाके में सिर्फ पोस्टपेड मोबाइल नेटवर्क ही ठीक से काम करता है, प्रीपेड सिम अक्सर नेटवर्क छोड़ देती है। यही वजह है कि प्रशासन ने बेस कैंप पर टेलीकॉम कंपनियों के खास काउंटर लगाए हैं, जहां श्रद्धालु पहचान पत्र दिखाकर वहीं का पोस्टपेड सिम ले सकते हैं। ऐसे में UPI पेमेंट पर पूरी तरह निर्भर रहना रिस्की हो सकता है। खच्चर वाले, पालकी वाले, छोटे ढाबे और लोकल दुकानदार ज्यादातर कैश में ही लेनदेन करते हैं और नेटवर्क गड़बड़ होने पर पेमेंट अटकने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में अगर आपके पास कैश नहीं है, तो मुश्किल की घड़ी में आप पूरी तरह फंस सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा में कितना कैश साथ रखें?

अपने कुल अनुमानित बजट का कम से कम 60-70% हिस्सा कैश के तौर पर साथ रखना चाहिए बाकी इमरजेंसी के लिए कार्ड या डिजिटल बैकअप के तौर पर रखा जा सकता है। छोटे-छोटे नोटों में पैसा रखना ज्यादा बेहतर रहता है, क्योंकि दूर-दराज इलाकों में बड़े नोटों का खुल्ला मिलना भी आसान नहीं होता है।

अमरनाथ यात्रा पर निकलने से पहले ये जरूर करें

  • कौन सा ट्रैवल ऑप्शन (पैदल, खच्चर, हेलीकॉप्टर) चुनना है, ये पहले से डिसाइड कर लें। ऐन मौके पर फैसला लेना महंगा पड़ सकता है
  • जरूरत से थोड़ा ज्यादा कैश साथ रखें, ताकि मौसम खराब होने या यात्रा में देरी होने की स्थिति में भी परेशानी न हो।
  • पहुंचते ही बेस कैंप पर पोस्टपेड सिम लें, ताकि जरूरत पड़ने पर संपर्क बना रहे।
  • सिर्फ अधिकृत रेट लिस्ट के हिसाब से ही पेमेंट करें। ओवरचार्जिंग से बचने के लिए तय किराया और रेट पहले से जान लें।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल यात्रा से जुड़ी सामान्य जानकारी और उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। किराया, रेट और नियम बदल भी सकते हैं, इसलिए यात्रा पर जाने से पहले SASB की आधिकारिक वेबसाइट से ताजा जानकारी जरूर चेक कर लें।