जम्मू-कश्मीर से स्पेशल स्टेटस हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर घाटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा बहाल न किए जाने के विरोध में 'INDIA' गठबंधन के नेतृत्व में कई पार्टियां दिल्ली और कश्मीर में विरोध प्रदर्शन करेंगी।

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा यानी स्पेशल स्टेटस हटाए जाने की सातवीं सालगिरह पर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। राज्य का दर्जा वापस नहीं दिए जाने से नाराज कई राजनीतिक पार्टियां 'INDIA' गठबंधन के नेतृत्व में दिल्ली और कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और अपनी पार्टी जैसी पार्टियों का मुख्य आरोप है कि सात साल बीत जाने के बाद भी राज्य का दर्जा बहाल न करना एक बड़ा धोखा है।

विपक्षी दलों की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किए गए अपने उस वादे को पूरा नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा वापस देने पर फैसला लिया जाएगा। इसी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस आज 'INDIA' गठबंधन के सहयोग से संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन करेगी। वहीं, पीडीपी ने कश्मीर घाटी के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का फैसला किया है। हालांकि, पुलिस ने इन विरोध प्रदर्शनों की इजाजत नहीं दी है, जिसके चलते किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए पूरी घाटी में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है।

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ था? जानिए…

अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला हुआ : भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने का फैसला किया। इससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हो गया।

अनुच्छेद 35A भी खत्म हो गया : अनुच्छेद 370 के प्रभावी रूप से हटने के साथ ही अनुच्छेद 35A भी लागू नहीं रहा। यह प्रावधान राज्य के "स्थायी निवासियों" को कुछ विशेष अधिकार देता था।

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हुआ : पहले जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान और अलग झंडा था। 5 अगस्त 2019 के बाद वहां भी भारतीय संविधान पूरी तरह लागू हो गया।

राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया : संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून (Jammu and Kashmir Reorganisation Act) पास किया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। यह बदलाव 31 अक्टूबर 2019 से लागू हुआ।

संसद में गृह मंत्री ने प्रस्ताव पेश किया :  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने और पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए :  फैसले से पहले और बाद में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए। कई इलाकों में धारा 144 लागू की गई।

इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक लगी : कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ समय तक मोबाइल, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाएं बंद रखी गईं। बाद में इन्हें फेज वाइज बहाल किया गया।

कई नेताओं को नजरबंद किया गया : संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को कुछ समय के लिए नजरबंद या हिरासत में रखा गया।

देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई :  इस फैसले का कुछ राजनीतिक दलों ने समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसका विरोध किया। यह भारत की राजनीति और संविधान से जुड़े सबसे बड़े फैसलों में से एक माना गया।

यह फैसला आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है : 5 अगस्त 2019 का फैसला जम्मू-कश्मीर की प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव था। इसके बाद वहां केंद्र सरकार के कई कानून सीधे लागू होने लगे और प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किए गए।