Ashok Gehlot Statement : 4 साल बाद अशोक गहलोत ने खोला क्या राज, जिससे कांग्रेस में मच गया हड़कंप? आखिर किसने गहलोत का पलट दिया पूरा खेल? अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचकर क्यों रुक गए गहलोत?

जयपुर. कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने पार्टी के अंदर का 4 साल पुराना वो मामला उठाया है, जब वो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते-बनते रह गए थे। उन्होंने इतना तक कहा कि मेरे नाम का हाईकमान फैसला तक कर चुके थे। लेकिन आखिर में मेरे खिलाफ साजिश हो गई और सारा मामला ही पलट गया। लेकिन लोगों को यह सच पता नहीं है तो आज मैं आपको सब बताता हूं।

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अशोक गहलोत बोले-मुझे बदनाम किया गया

अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा-सोचिए जिस पद पर गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, वही कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? गहलोत ने आगे कहा- वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।

गहलोत का सच कोई नहीं जानता?

अशोक गहलोत ने आगे कहा कि हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा।

गहलोत क्यों बोले-मैं अनपढ़ नहीं हूं…

  • मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ।
  • आखिर में गहलोत ने कहा- आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। 

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