Jorhat Flood 2026: असम के जोरहाट में बाढ़ आए एक महीना बीत चुका है, लेकिन मजिया भेटी गांव में परिवार अब भी जिंदगी पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके घर, फसलें और रोजी-रोटी सब कुछ छिन गया है। दिहाड़ी मजदूरों को तो अगले वक्त के खाने और भविष्य की चिंता सता रही है।

Assam Flood 2026: असम के जोरहाट में आई विनाशकारी बाढ़ को करीब एक महीना हो गया है। लेकिन मजिया भेटी गांव में प्रभावित परिवार आज भी अपनी जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने के लिए जूझ रहे हैं। बाढ़ में उनके घर, फसलें, मवेशी और रोजी-रोटी का जरिया, सब कुछ तबाह हो गया है।

गांव में बाढ़ का पानी घुसे 28 दिन हो चुके हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि इस तबाही का असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर अब भी महसूस हो रहा है। जो परिवार खेती और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थे, उनकी हालत सबसे खराब है। फसलें, मछली पालन के तालाब और घर का सारा सामान बर्बाद हो गया है। अब उन्हें आमदनी और दो वक्त की रोटी की चिंता सता रही है।

'अब मेरे पति ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं'

मजिया भेटी की रहने वाली मानशी गोगोई ने बताया कि मवेशियों के लिए रखा चारा बह गया, जबकि उनके तालाब में पाली गई मछलियां भी खत्म हो गईं। उन्होंने कहा, "बाढ़ ने हमारे घर का सब कुछ बर्बाद कर दिया है। यहां तक कि मवेशियों के लिए जो चारा हमने जमा किया था, वह भी बह गया। हमारे तालाब की सारी मछलियां खत्म हो गईं और हमारे खेत भी बर्बाद हो गए।"

मानशी ने बताया कि उनके परिवार ने छह बीघा जमीन पर खेती की थी, लेकिन बाढ़ ने पूरी फसल चौपट कर दी। वह कहती हैं, "हमने छह बीघा जमीन पर खेती की थी, लेकिन बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया। हमें उम्मीद थी कि इस फसल से तीन-चार महीने का गुजारा चल जाएगा। अब तो यह भी नहीं पता कि रोज का खाना कैसे जुटेगा।"

उन्होंने बताया कि परिवार को 'लखपति बायदेव' योजना के तहत 10,000 रुपये मिले थे, जिससे उन्होंने अपने तालाब में मछली डाली थी। लेकिन बाढ़ के पानी ने मछलियों को बहा दिया, जिससे उनका सारा निवेश डूब गया।

बाढ़ से पहले, परिवार अपने घर के आसपास सब्जियां भी उगाता था। मानशी ने कहा कि भोजन और आमदनी का वह जरिया भी खत्म हो गया, जिससे अब उनके पति ही परिवार के लिए रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा बचे हैं। मानशी ने कहा, "मेरे पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। आने वाले दिनों के लिए हमारे पास कोई सहारा नहीं बचा है। पहले हम घर के पास सब्जियां उगा लेते थे, लेकिन बाढ़ ने सब कुछ नष्ट कर दिया। अब मेरे पति ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं।"

कर्ज और बेघर होने का दर्द

बाढ़ से प्रभावित एक और निवासी, नवज्योति गोगोई ने बताया कि घर और रोजी-रोटी छिन जाने के बाद उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बंधन बैंक और एक स्वयं सहायता समूह से कर्ज लिया था और अब बाढ़ की तबाही के बाद उन्हें चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

नवज्योति के मुताबिक, उनके तालाब में करीब 50,000 रुपये की मछलियां थीं। पिछले साल की मछलियां भी मौजूद थीं, लेकिन बाढ़ सब बहा ले गई।

घर में पानी भर जाने के बाद परिवार को कई दिनों तक दूसरों के घरों में रहना पड़ा। नवज्योति ने बताया कि वे काफी समय तक एक दोस्त के घर पर रहे और परसों ही अपने घर लौटे हैं। उन्होंने कहा, "पिछले कई दिनों से हम दूसरों के घरों में रह रहे थे। काफी समय तक एक दोस्त के घर रुके और परसों ही घर वापस आए हैं।"

नवज्योति ने बताया कि उनके परिवार में पांच सदस्य हैं - उनके माता-पिता, पत्नी, बच्चा और वह खुद - और वह अकेले कमाने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ की वजह से उनके बेटे की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है।

उन्होंने सरकार से परिवार को फिर से बसाने में मदद की अपील करते हुए कहा, "हम दिहाड़ी मजदूर हैं, और अब हमारा घर और रोजी-रोटी का जरिया दोनों छिन गया है।" इन दोनों परिवारों के अनुभव मजिया भेटी के निवासियों की उन मुश्किलों को उजागर करते हैं, जिनका सामना वे बाढ़ के लगभग एक महीने बाद भी कर रहे हैं। खेत, तालाब और घरेलू संपत्ति के नष्ट हो जाने से, दिहाड़ी मजदूरी और खेती पर निर्भर परिवार अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही उन नुकसानों से भी जूझ रहे हैं जिन्होंने उनकी लंबी अवधि की आजीविका को प्रभावित किया है।

सरकार ने जारी की बाढ़ सहायता राशि

इससे पहले सोमवार को, राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों की पीड़ा को कम करने के प्रयासों के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सिवासागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में 31,951 परिवारों को 47.93 करोड़ रुपये की अंतरिम बाढ़ सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जारी की। हर परिवार को 15,000 रुपये मिले। यह राशि गुवाहाटी के लोक सेवा भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में जारी की गई। (ANI)