Bangladesh Election Results: 20 साल वनवास के बाद BNP की वापसी, जमात का कैसे खेल बिगड़ा?
Bangladesh Election Results: बांग्लादेश चुनाव 2026 में BNP ने बड़ी जीत दर्ज कर 20 साल बाद सत्ता में वापसी की। जमात-ए-इस्लामी को करारी हार मिली। तारिक रहमान की वापसी ने सियासी समीकरण बदले, लेकिन PM पद पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है।

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में हुए ताज़ा आम चुनाव देश के इतिहास के सबसे अहम चुनावों में गिने जा रहे हैं। अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था। इस चुनाव में जनता ने सिर्फ़ वोट नहीं दिया, बल्कि 20 साल पुरानी राजनीतिक तस्वीर को भी पलट दिया। मुख्य मुकाबला था बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसकी पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच। अवामी लीग के बाहर होने से चुनाव सीधा और बेहद टकराव भरा बन गया।
ये चुनाव इतने अहम क्यों माने जा रहे हैं?
अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के हटने के बाद देश में अंतरिम सरकार बनी थी। करीब दो साल बाद हुए ये आम चुनाव बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं, क्योंकि इस बार अवामी लीग चुनावी मैदान में नहीं थी।
BNP की वापसी: 20 साल के देश निकाले के बाद कैसे पलटी बाज़ी?
चुनाव नतीजों के शुरुआती आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। कुल 299 सीटों में से 249 सीटों पर गिनती पूरी होने तक BNP और उसके सहयोगियों को 181 सीटें मिल चुकी थीं, जबकि जमात और उसके सहयोगी सिर्फ़ 61 सीटों पर सिमटते दिखे।
BNP की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी करीब दो दशक तक सत्ता से बाहर रही। पार्टी के चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान अब बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
जमात-ए-इस्लामी क्यों पिछड़ गई? क्या रणनीति फेल हो गई?
एक समय BNP की सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी इस चुनाव में कमजोर साबित हुई। सीटों में भारी गिरावट ने साफ कर दिया कि जनता का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। नतीजों में देरी को लेकर जमात ने आरोप लगाए। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कई सीटों पर जानबूझकर नतीजे रोके गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अभी कोई अंतिम बयान नहीं दिया है।
भारत को लेकर जमात का बदला रुख: मजबूरी या नई रणनीति?
जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने चुनाव के बीच भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश की प्राथमिकता रहेगा और दोनों देशों को मिलकर विकास और शांति के लिए काम करना चाहिए।
खालिदा ज़िया के बाद BNP को क्या चुनौतियां मिलीं?
खालिदा ज़िया के बाद BNP को संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती थी। तारिक रहमान का नेतृत्व ऐसे समय में सामने आया जब देश राजनीतिक अशांति और अविश्वास के दौर से गुजर रहा था। फिर भी, चुनाव नतीजों ने दिखा दिया कि पार्टी ने जनता का भरोसा फिर से हासिल कर लिया है।
जुलाई नेशनल चार्टर: सुधार या नई राजनीति की नींव?
इन चुनावों के साथ 84-पॉइंट वाले ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर भी जनमत हुआ। इसका मकसद शासन व्यवस्था सुधारना, चुनावी पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही तय करना है। हालांकि, इन सुधारों को लागू करना अभी भी विवादों में है। अभी चुनाव आयोग की अंतिम घोषणा बाकी है, लेकिन संकेत साफ हैं-बांग्लादेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस का कार्यकाल अब समाप्ति की ओर है।
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