Israel Lebanon Conflict: बेरूत में इजरायल के ताजा हवाई हमलों से सीजफायर खतरे में पड़ गया है। हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी रॉकेट दागे हैं। 300 से ज्यादा मौतों के बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
जिस युद्धविराम से शांति की उम्मीद जगी थी, वही अब टूटता नजर आ रहा है। लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बार फिर जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी, जब इजरायली लड़ाकू विमानों ने कई इलाकों पर हवाई हमले किए। इन हमलों ने पहले से ही नाजुक हालात को और बिगाड़ दिया है। खास बात यह है कि ये हमले उस वक्त हुए, जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने की बात कही जा रही थी।
ट्रंप की अपील के बाद भी नहीं रुके हमले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हमले कम करने की अपील की थी। बताया गया था कि इजरायल अपने ऑपरेशन को “लो-की” करेगा, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। हमले कम होने के बजाय नए सिरे से तेज होते दिख रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
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हिज़्बुल्लाह का पलटवार, इजरायल पर दागे रॉकेट
इजरायली हमलों के जवाब में लेबनान के संगठन हिज़बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की है। हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने उत्तरी इजरायल के शहर किर्यात शमोना और मिसगव आम पर रॉकेट दागे हैं। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई इजरायल द्वारा सीजफायर के उल्लंघन के जवाब में की गई है। संगठन ने साफ कहा है कि जब तक “इजरायल-अमेरिका की आक्रामकता” खत्म नहीं होती, तब तक उनका जवाब जारी रहेगा।
300 से ज्यादा मौतें, हजारों घायल
इससे पहले भी बेरूत में बड़े हमले हुए थे, जहां घनी आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- 300 से ज्यादा लोगों की मौत
- 1000 से ज्यादा लोग घायल
ये हमले उस समय हुए थे, जब अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटे बीते थे।
सीजफायर पर बढ़ता विवाद
ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया गया था, यानी वहां भी हमले रुकने चाहिए थे। लेकिन इजरायल और अमेरिका इस दावे से सहमत नहीं हैं। इसी वजह से अब यह युद्धविराम कमजोर पड़ता दिख रहा है। ईरान की न्यूज एजेंसी ने भी संकेत दिया है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रुके तो बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी
कूटनीतिक कोशिशें जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
इस बीच अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले हैं, जिसमें स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे। अगले हफ्ते वॉशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, लेबनान ने साफ कर दिया है कि वह पहले युद्धविराम चाहता है, उसके बाद ही किसी वार्ता में शामिल होगा।
क्या फिर भड़क सकती है बड़ी जंग?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
सीजफायर के बावजूद जारी हमले यह दिखाते हैं कि जमीनी सच्चाई कितनी जटिल है। एक तरफ कूटनीतिक कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ मिसाइल और बम गिर रहे हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह तनाव शांति में बदलेगा या एक और बड़े संघर्ष की शुरुआत करेगा।
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