भोपाल सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का त्योहार खास तरीके से मनाया गया। शुक्रवार को यहां बहनों को अपने कैदी भाइयों से मिलने और उन्हें राखी बांधने की इजाजत दी गई। इस मौके पर कई बहनें भावुक हो गईं और उन्होंने भाइयों से गलती न दोहराने का वादा लिया।

भोपाल (मध्य प्रदेश: भोपाल सेंट्रल जेल में शुक्रवार को रक्षाबंधन का त्योहार एक खास माहौल में मनाया गया। यहां बहनों को जेल के अंदर जाकर अपने कैदी भाइयों से मिलने और उन्हें राखी बांधने की इजाजत दी गई। लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलकर कई बहनें बेहद खुश हुईं। इस मौके पर उन्होंने अपने भाइयों से यह वादा भी लिया कि वे अपनी गलतियों को दोबारा नहीं दोहराएंगे।

रक्षाबंधन पर जेल प्रशासन ने किए खास इंतजाम

  • जेल सुपरिटेंडेंट मनेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जेल आने वाली बहनों के लिए खास इंतजाम किए गए थे। जेल कैंटीन के जरिए ही राखी, मिठाई और कुमकुम उपलब्ध कराए गए। परिहार ने कहा, "रक्षाबंधन के मौके पर, जो बहनें अपने कैदी भाइयों को राखी बांधना चाहती हैं, उनके लिए जेल कैंटीन से मिठाई, राखी, कुमकुम और दूसरी चीजों का इंतजाम किया गया है। महिला गार्ड्स की अच्छी तरह तलाशी के बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया जा रहा है। उनकी 20-25 मिनट की मुलाकात के बाद, हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि वे सुरक्षित तरीके से बाहर निकलें।"
  • जब उनसे पूछा गया कि क्या कैदियों से मुलाकात के लिए कोई कैटेगरी बनाई गई है, तो अधिकारी ने बताया कि आम कैदियों के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं है और उनके परिवार वालों को मिलने का एक ही समय दिया गया है। हालांकि, जो कैदी प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हैं, उनके लिए शाम को अलग से मिलने का समय रखा गया है।

भोपाल जेल में अभी करीब 3,648 कैदी

  • जेल सुपरिटेंडेंट मनेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जेल में अभी करीब 3,648 कैदी हैं। इनमें से लगभग 1,100-1,200 कैदियों की मुलाकात हो चुकी है और करीब 3,500 घरवाले उनसे मिलने आ चुके हैं।
  • जेल सुपरिटेंडेंट ने यह भी बताया कि जेल में करीब 180 महिला कैदी भी बंद हैं और उनके भाइयों से मुलाकात के लिए अलग इंतजाम किए गए हैं।
  • जो पुरुष अपनी कैदी बहनों से मिलने आएंगे, उन्हें शाम 3 बजे से 4 बजे के बीच मिलने दिया जाएगा। जब अभी वाली भीड़ थोड़ी कम हो जाएगी, तब उनकी मुलाकात अलग से कराई जाएगी।"

बेहद भावुक था जेल में राखी बांधने का पल

  • यह मौका कई बहनों के लिए भावुक पल लेकर आया, जो लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलीं। कुछ बहनों ने कहा कि उन्होंने अपने भाइयों से कोई तोहफा नहीं मांगा, बल्कि यह वादा लिया कि वे दोबारा ऐसी कोई गलती नहीं करेंगे, जिसकी वजह से उन्हें जेल आना पड़ा।
  • अपने भाई से मिलकर राधा चौधरी काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “हम बहुत समय बाद अपने भाई से मिले। यह बहुत दुख की बात है कि बच्चे कभी-कभी गलत रास्ता चुन लेते हैं और परिवार को ऐसा दिन देखना पड़ता है जब वे साथ नहीं होते। मैंने अपने भाई से कहा कि दोबारा ऐसा कुछ मत करना कि हमें यहां आना पड़े। उसने भी वादा किया कि वो ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उसे त्योहारों पर परिवार से दूर रहना पड़े।”एक और बहन, ममता सिंह, ने जेल प्रशासन के इंतजामों की तारीफ की।