बिहार की दिव्यांग सोनी कुमारी का 2 किमी पैदल स्कूल जाने का वीडियो वायरल हुआ। प्रशासन द्वारा दी गई घटिया ट्राईसाइकिल जल्द ही टूट गई, लेकिन डॉक्टर बनने का उनका हौसला नहीं टूटा। वह अब भी पढ़ाई के लिए संघर्ष कर रही हैं।
बिहार के गोपालगंज जिले के हुसैनपुर गांव की रहने वाली सोनी कुमारी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सोनी के दोनों पैरों में दिक्कत है, इसके बावजूद वह हर दिन दो किलोमीटर पैदल चलकर अपने स्कूल जाती हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद पढ़ाई के लिए सोनी के इस जज्बे की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कौन हैं सोनी कुमारी?
सोनी कुमारी के जन्म से पहले ही उनके पिता नंदकिशोर राम का निधन हो गया था। उनकी मां गुलाईची देवी दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं। गुलाईची देवी के सामने सवाल था कि बेटी के इलाज पर पैसा खर्च करें या परिवार का गुजारा चलाएं। इन सब मुश्किलों के बीच, 15 साल की सोनी अपने कमजोर पैरों से ही स्कूल जाती रहीं। किसी ने उनकी इस मुश्किल यात्रा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। सोनी की कहानी सामने आने के बाद बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर, एक्टर सोनू सूद और कवि कुमार विश्वास समेत कई लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
जिला प्रशासन का 'घटिया' तोहफा
मामला वायरल होने पर जिला प्रशासन भी हरकत में आया और सोनी को एक ट्राईसाइकिल तोहफे में दी। लेकिन यह तोहफा अब प्रशासन के लिए ही मुसीबत बन गया है। गिफ्ट मिलने के कुछ ही दिनों के अंदर साइकिल खराब हो गई। यह एक हाथ से चलाने वाली तीन पहियों की साइकिल थी, लेकिन इसके पैडल से जुड़ी रॉड टूट गई। सोशल मीडिया पर लोग आरोप लगा रहे हैं कि साइकिल बनाने में बहुत खराब क्वालिटी का सामान इस्तेमाल किया गया था, जिस वजह से यह इतनी जल्दी टूट गई।
डॉक्टर बनना चाहती है सोनी
जिला प्रशासन की दी हुई ट्राईसाइकिल भले ही टूट गई हो, लेकिन सोनी का हौसला नहीं टूटा है। वह अब भी पहले की तरह ही स्कूल जा रही हैं। सोनी का कहना है कि वह पढ़ना चाहती हैं और अपने गांव के लोगों की सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए वह डॉक्टर बनने का सपना देखती हैं। पढ़ने की इतनी लगन रखने वाली एक बच्ची को प्रशासन की तरफ से ऐसी घटिया साइकिल दिए जाने पर सोशल मीडिया पर लोग काफी गुस्सा हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश दे रहा है? कुछ लोगों ने पूछा कि क्या दिव्यांग और बेसहारा लोगों के साथ प्रशासन का यही रवैया है? वहीं, कई यूजर्स ने इसे बिहार में फैले भ्रष्टाचार का एक और सबूत बताया।


