Bihar सरकार की नई टूरिज़्म पॉलिसी के तहत सरकारी कर्मचारियों को कितनी बार और कितने दिनों की यात्रा करना अनिवार्य किया गया है? इस योजना के तहत कर्मचारियों को यात्रा के दौरान किन नियमों और शर्तों का पालन करना होगा? सरकार ने इस नई नीति को लागू करने के पीछे क्या उद्देश्य बताए हैं, और यात्रा के खर्च को लेकर क्या स्थिति है?
पटना: राज्य में घूमने-फिरने (टूरिज़्म) को बढ़ावा देने के लिए बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने एक बड़ा और दिलचस्प फैसला लिया है। अब राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए हर 3 महीने में परिवार के साथ कम से कम 2 दिन की यात्रा करना ज़रूरी कर दिया गया है।

बिहार की ये नई टूरिज़्म पॉलिसी क्या है?
- हर सरकारी कर्मचारी को हर 3 महीने में एक बार परिवार के साथ घूमना होगा।
- यह यात्रा अपने जिले से बाहर किसी दूसरे जिले में करनी होगी।
- ट्रिप शुक्रवार और शनिवार को प्लान करनी होगी, जिसमें कुल 2 रात और 2 दिन शामिल हों।
- घूमने के दौरान कम से कम 3 लोकल जगहों पर जाना होगा। इस दौरान सरकारी काम करने की इजाज़त नहीं होगी।
- खास तौर पर राज्य के इको-टूरिज़्म और ग्रामीण टूरिस्ट स्पॉट्स पर जाने के लिए कहा गया है।
- यात्रा की तस्वीरें खींचकर जमा करनी होंगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि उस जगह को और बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।
- सबसे खास बात, यात्रा के इन दिनों को छुट्टी में नहीं गिना जाएगा, बल्कि इसे 'ऑन ड्यूटी' माना जाएगा।
इस योजना का मकसद क्या है?
- स्थानीय टूरिज़्म को बढ़ावा देना और टूरिज़्म के नक्शे पर नई जगहों को शामिल करना।
- जब हज़ारों लोग घूमने निकलेंगे, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को ज़बरदस्त फ़ायदा होगा और लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
- टूरिस्ट जगहों की कमियों का पता लगाकर उन्हें सुधारने में सरकार को मदद मिलेगी।
खर्च कौन उठाएगा?
सरकार की तरफ से जारी आदेश में यात्रा पर होने वाले खर्च को लेकर कोई साफ़ जानकारी नहीं दी गई है। कुछ सूत्रों का कहना है कि कर्मचारी के आने-जाने और खाने का खर्च सरकार देगी, लेकिन परिवार के सदस्यों का खर्च कर्मचारी को खुद उठाना होगा। वहीं, कुछ दूसरे सूत्रों के मुताबिक, हो सकता है कि पूरा खर्च कर्मचारियों को ही उठाना पड़े।
