बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने लड़कियों की पढ़ाई को गैर-जरूरी बताते हुए उन्हें घर में रहने को कहा है। इस बयान पर विवाद छिड़ गया है और उनकी कड़ी आलोचना हो रही है।

पटना: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिस पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा है कि लड़कियों को पढ़ने-लिखने की कोई ज़रूरत नहीं है और उन्हें घर की चारदीवारी में ही रहना चाहिए। इस बयान के बाद वो आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं।

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मंत्री ने सवाल पूछते हुए कहा, 'पढ़ाई-लिखाई की क्या ज़रूरत है? हमारे घर की बेटियां हमारी ताक़त हैं। जब मोदीजी उनके लिए खड़े हैं, तो उन्हें पढ़ने के लिए बाहर जाने की क्या ज़रूरत है?' नए-नए शिक्षा मंत्री बने तिवारी के इस बयान के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोग जमकर गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं।

जब पत्रकारों ने उनसे कहा कि शिक्षा लड़कियों का अधिकार है, तो मंत्री का जवाब था कि लड़कियों को उनके अधिकार अपने आप मिल जाएंगे। आलोचकों का कहना है कि जब देश महिला सशक्तिकरण की बात कर रहा है, तब एक मंत्री का ऐसा बयान देना भारत को अंदर से कमज़ोर करने जैसा है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि 2026 में भी ऐसी सोच रखना बेहद शर्मनाक है।

मिथिलेश तिवारी गोपालगंज ज़िले के बैकुंठपुर से बीजेपी के विधायक हैं। हैरानी की बात है कि वो खुद इकोनॉमिक्स में बीए (ऑनर्स) हैं और एक शिक्षक भी रह चुके हैं। कुछ समय तक उन्होंने पटना में एक कोचिंग इंस्टीट्यूट भी चलाया था।

तिवारी ने 1988 में एबीवीपी से अपना राजनीतिक सफ़र शुरू किया था। 1990 में वे बीजेपी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में आ गए। आरजेडी के शासनकाल में, उन्होंने फरवरी 2005 में बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2015 में, उन्होंने जेडी(यू)-आरजेडी उम्मीदवार को हराकर चुनाव जीता। 2020 के चुनाव में वे बैकुंठपुर से हार गए थे। 2025 में आरजेडी उम्मीदवार को हराकर मिथिलेश विधायक बने।