बिहार के जहानाबाद में ग्रामीण नई सड़क तोड़कर निजी इस्तेमाल के लिए कंक्रीट ले जा रहे हैं। वायरल वीडियो ने सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग और गरीबी पर बहस छेड़ दी है। यह घटना विकास और जमीनी हकीकत के बीच तनाव को दर्शाती है।

बिहार से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे। यहां के जहानाबाद जिले के ओदान बीघा जैसे गांवों में लोग नई बन रही सड़कों को ही तोड़कर उसका मसाला और कंक्रीट अपने घर ले जा रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और इस पर बहस छिड़ गई है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग, सभी लोग मिलकर गीले कंक्रीट और अधबनी सड़क की पटिया उखाड़ रहे हैं। वे इस मलबे को बोरियों और तसलों में भरकर ले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे इसका इस्तेमाल अपने निजी घर बनाने के लिए कर रहे हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

View post on Instagram

ये वीडियो क्लिप्स बिहार में इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आग की तरह फैल गए, जिसके बाद लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने टैक्सपेयर्स के पैसे से बने पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के ऐसे दुरुपयोग की निंदा की। उनका कहना है कि विकास के कामों को इस तरह बर्बाद करना सरकारी संसाधनों की बर्बादी है। वहीं, कुछ लोगों ने इस तरह के कामों के पीछे की मजबूरी पर भी ध्यान दिलाया। उनका मानना है कि बहुत ज्यादा गरीबी और सिर पर छत की जद्दोजहद अक्सर लोगों को ऐसे काम करने पर मजबूर कर देती है, जो सामाजिक नियमों के खिलाफ होते हैं।

लोगों ने क्या कुछ कहा…

इन वायरल वीडियो ने गुस्सा तो पैदा किया ही है, साथ ही कुछ असहज सवाल भी खड़े किए हैं। ये सवाल हैं कि क्या जिंदा रहने की जरूरतें नागरिक कर्तव्यों से बड़ी हैं? जहां एक तरफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की आलोचना हो रही है, वहीं ये घटनाएं ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए घर की कमी की गंभीर समस्या को भी दिखाती हैं।

अब अधिकारियों पर इस बात का दबाव है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर के दुरुपयोग को भी रोकें और उन गहरी सामाजिक समस्याओं को भी हल करें, जिनकी वजह से लोग ऐसा करने पर मजबूर हो रहे हैं। ऑनलाइन बहस अभी भी जारी है, जो बिहार में विकास के लक्ष्यों और जमीनी हकीकत के बीच के तनाव को दिखाती है।