UP के डिप्टी CM बृजेश पाठक के 'नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा चलाओ' बयान पर सियासी बवाल मचा है। जानिए उन्होंने क्या कहा, वीडियो का पूरा संदर्भ और विपक्ष की प्रतिक्रिया।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह बना डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का ई-रिक्शा और नौकरी को लेकर बयान। लखनऊ में भारत टैक्सी के लॉन्च कार्यक्रम में दिए उनके संबोधन का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। हालांकि, पूरे संदर्भ में उनका संदेश स्वरोजगार और ड्राइविंग पेशे को लेकर था।
आखिर बृजेश पाठक ने क्या कहा?
23 सितंबर को लखनऊ में भारत टैक्सी सेवा के कार्यक्रम में पाठक ने ड्राइवरों को संबोधित करते हुए नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपना काम करने की बात कही। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोई व्यक्ति कुछ घंटे ई-रिक्शा या टैक्सी चलाकर कमाई कर सकता है और फिर बच्चों के साथ समय बिता सकता है।
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वीडियो वायरल हुआ तो शुरू हुआ सियासी विवाद
बयान का छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे युवाओं को नौकरी छोड़कर ई-रिक्शा चलाने की सलाह के तौर पर पेश किया गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं ने सरकार की रोजगार नीति पर सवाल उठाए। रिपोर्टों के मुताबिक सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी पाठक के बयान पर निशाना साधा।
पूरा संदर्भ क्या बताता है?
न्यूज़ चैनल NDTV द्वारा की गई पड़ताल के मुताबिक वायरल वीडियो असली है, लेकिन कार्यक्रम में सामने मौजूद लोगों में बड़ी संख्या उन ड्राइवरों की थी जो भारत टैक्सी सेवा से जुड़ने वाले थे। पाठक का जोर इस बात पर था कि ड्राइविंग को स्वरोजगार के तौर पर अपनाने वाला व्यक्ति अपने समय पर काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि घर लौटते समय आसपास की सवारी लेकर परिवार के लिए समय निकाला जा सकता है।
ओमप्रकाश राजभर ने किया बचाव
यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पाठक के बयान का बचाव करते हुए कहा कि सरकार हर व्यक्ति को नौकरी नहीं दे सकती और स्वरोजगार भी रोजगार का एक रास्ता है। उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी टेम्पो चलाया है। उनका तर्क था कि किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।
रोजगार बनाम स्वरोजगार पर छिड़ी नई बहस
विवाद अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि युवाओं के लिए सरकारी या निजी नौकरी और स्वरोजगार—इन दोनों विकल्पों को किस तरह देखा जाए। पाठक के बयान को लेकर विपक्ष ने जहां रोजगार सृजन पर सवाल उठाए हैं, वहीं उनके समर्थकों का जोर आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक कमाई के रास्तों पर है। ऐसे में आने वाले चुनावी दौर में रोजगार का मुद्दा किस रूप में सामने आता है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
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