Canada Viral Video: कनाडा के 18 वर्षीय टीनएजर का होटल से जुड़ा एक वायरल वीडियो इंटरनेट पर रहस्य और बहस का केंद्र बन गया है। की-कार्ड की गड़बड़ी में एक भारतीय की मदद ने उसे चौंका दिया। लेकिन इस घटना ने इमिग्रेशन, नस्लीय रूढ़ियों और भारतीय समुदाय की छवि पर ऑनलाइन तूफ़ानी विवाद खड़ा कर दिया। 

Canada Teen Viral Video: कनाडा में इस समय इमिग्रेशन (आप्रवासन) और सांस्कृतिक तालमेल को लेकर बहस अपने चरम पर है। इसी बीच, एक कनाडाई टीनेजर के सोशल मीडिया वीडियो ने इस सुलगती आग में घी डालने का काम कर दिया है। 18 साल के टायसन हॉकले नाम के इस लड़के ने एक छोटी सी घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा लिख दिया, जिसके बाद इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है।

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जब आधी रात को बंद हुआ दरवाज़ा...

टायसन हॉकले अपने होटल के कमरे के बाहर खड़ा परेशान हो रहा था। लाख कोशिशों के बाद भी वह अपने कमरे का 'की-कार्ड' इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। एक अनजान शहर के होटल में खुद को कमरे से बाहर फंसा पाकर वह घबरा चुका था। तभी वहाँ कुछ ऐसा हुआ जिसने टायसन की पूरी सोच को बदल कर रख दिया।

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अंधेरे में मसीहा बनकर आया एक अनजान चेहरा

जब टायसन की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं, तब गलियारे से गुज़र रहा एक भारतीय लड़का उसकी मदद के लिए आगे आया। उस भारतीय युवक ने बिना किसी हिचकिचाहट के तकनीकी दिक़्क़त को समझा और टायसन को उसके कमरे के अंदर पहुंचाया। इस छोटी सी मदद से टायसन इस कदर प्रभावित हुआ कि उसने तुरंत एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। उसने वीडियो में कहा: "यार, अंदाज़ा लगाओ कि कौन आया और मेरी मदद की? एक भारतीय लड़का। यह उन सभी लोगों के लिए है जो मुझ पर तब गुस्सा होते हैं जब मैं कहता हूँ कि भारतीय अच्छे और समझदार लोग हैं।"

एक ऐसा कैप्शन जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया

टायसन ने वीडियो तो पोस्ट किया ही, लेकिन जिस बात ने सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा, वह था उसका कैप्शन। उसने लिखा: "अभी-अभी एक भारतीय लड़के ने मेरी जान बचाई। इसीलिए हमें कनाडा में और ज़्यादा भारतीयों की ज़रूरत है।" बस फिर क्या था, यह वीडियो जंगल में आग की तरह फैल गया। कनाडा में पहले से ही इमिग्रेशन नीतियों को लेकर गंभीर चर्चाएँ चल रही हैं, ऐसे में एक टीनेजर का यह बयान ऑनलाइन जंग की वजह बन गया।

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तारीफ़ों के बीच अचानक फूटा आलोचनाओं का गुब्बारा

वीडियो वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां कुछ लोगों ने टायसन के इस सकारात्मक संदेश की सराहना की और भारतीय समुदाय के साथ अपने अच्छे अनुभव साझा किए, वहीं एक बड़ा वर्ग इस बात पर भड़क गया। एक नाराज़ यूज़र ने टिप्पणी की, "तुम्हारी जान सिर्फ इसलिए बच गई क्योंकि तुम दरवाज़ा नहीं खोल पा रहे थे! आज के दिन की सबसे बेवकूफ़ी भरी पोस्ट के लिए मेरा वोट तुम्हें ही जाता है।" वहीं एक अन्य ने लिखा, "जान बचाई? तुम्हारा मतलब है कि तुम चाबी भूल गए थे और एक कर्मचारी ने दरवाज़ा खोल दिया। वह काला या गोरा होता, तो भी यही करता।"

क्या वाकई एक व्यक्तिगत अनुभव देश की नीति तय कर सकता है?

इस पूरी बहस ने एक गंभीर सवाल को जन्म दे दिया है। आलोचकों का तर्क है कि किसी एक व्यक्ति के निजी और अच्छे अनुभव के आधार पर पूरे देश की इमिग्रेशन या राष्ट्रीयता से जुड़ी नीतियों के बारे में इतनी बड़ी राय नहीं बनाई जा सकती। दूसरी तरफ, भारतीय मेहमाननवाज़ी के समर्थक भी खुलकर सामने आए। गुजरात के पड़ोसियों का हवाला देते हुए एक यूज़र ने लिखा कि वे बहुत ईमानदार, पेशेवर और विनम्र होते हैं। फिलहाल, यह वीडियो और इस पर शुरू हुई बहस थमने का नाम नहीं ले रही है, जिसने यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर एक छोटा सा की-कार्ड भी देशव्यापी बहस का कारण बन सकता है।