Chandrika Devi Temple Lucknow Closed: लखनऊ के चंद्रिका देवी मंदिर के रास्ते में गोमती नदी का पानी भरने से नवरात्र में दर्शन बंद हैं। पुलिस ने बैरियर लगाया है। जानिए बाढ़ का असर, फैजुल्लागंज के हालात और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी जानकारी।

नवरात्र में मां के दर्शन की आस लेकर लखनऊ के चंद्रिका देवी मंदिर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वजह कोई धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गोमती नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर है। मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर बाढ़ का पानी और तेज बहाव होने के कारण पुलिस ने बैरियर लगा दिया है। नवरात्र के बीच मंदिर में दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय दुकानदारों की चिंता भी बढ़ गई है।

चंद्रिका देवी मंदिर जाने से पहले जान लें ये बात

लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में स्थित करीब 300 साल पुराने चंद्रिका देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन इस बार गोमती नदी का पानी मंदिर के रास्ते तक आ गया है। मंदिर से करीब 200 मीटर पहले पुलिस ने बैरियर लगाया है और बाढ़ के कारण दर्शन बंद होने की सूचना दी है।

मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, करीब 20 साल बाद नदी का पानी इस तरह रास्ते तक पहुंचा है। नवरात्र में दर्शन की उम्मीद लेकर आए लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है। इससे मंदिर के आसपास दुकान लगाने वाले कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है।

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2008 के बाद 2026 में गोमती का जलस्तर बढ़ने से परेशानी

लखनऊ में सितंबर के आखिर में हुई भारी बारिश के बाद गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इसका असर शहर के कई इलाकों में देखने को मिला। नदी का पानी गोमती रिवरफ्रंट तक पहुंचने के कारण वहां भी आवाजाही प्रभावित हुई।

प्रशासन के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर करीब चार सेंटीमीटर कम हुआ है। हालांकि, जलस्तर में गिरावट के बावजूद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता सुरक्षित होने और दर्शन दोबारा शुरू होने की पुष्टि जरूरी है।

फैजुल्लागंज में घरों में पानी, नावों से राहत पहुंचाने की कोशिश

गोमती के बढ़े जलस्तर का असर लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में भी दिखाई दे रहा है। यहां कई घरों में पानी भरने से लोग घर छोड़कर चले गए हैं, जबकि कुछ लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन राहत और आवाजाही के लिए करीब 90 नावें चला रहा है।

ऐसे में चंद्रिका देवी मंदिर जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को सलाह है कि रवाना होने से पहले स्थानीय प्रशासन से रास्ते और दर्शन की स्थिति की पुष्टि कर लें। पानी के तेज बहाव वाले रास्ते पर बैरियर पार करने की कोशिश न करें।

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