China Taiwan Tension: चीन के बढ़ते दबाव के कारण ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाइ की विदेश यात्रा रद्द हो गई। कई देशों ने एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया, जिससे ताइवान की कूटनीतिक स्थिति और चीन-ताइवान तनाव पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है।
एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां बिना किसी सीधे टकराव के भी ताकत का प्रदर्शन साफ दिखाई दे रहा है। ताइवान के राष्ट्रपति की विदेश यात्रा रद्द होना सिर्फ एक कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि चीन की बढ़ती रणनीतिक पकड़ का संकेत माना जा रहा है।
विलियम लाइ चिंग-ते की प्रस्तावित एस्वातिनी यात्रा अचानक रद्द हो गई। ताइवान सरकार के मुताबिक, यह फैसला चीन के दबाव के कारण हुआ है। दरअसल, एस्वातिनी जाने के लिए जिन देशों के एयरस्पेस से गुजरना था, सेशेल्स, मेडागास्कर और मॉरीशस, उन्होंने राष्ट्रपति के विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी। ताइवान के प्रवक्ता का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर चीन के दबाव का नतीजा है।
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चीन का ‘साइलेंट प्रेशर’ कैसे काम कर रहा है?
चीन ने हाल के दिनों में ताइवान के खिलाफ अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। बिना युद्ध के दबाव बनाने की यह नीति अब खुलकर सामने आ रही है। कुछ दिन पहले ही चीन ने ताइवान के आसपास के एयरस्पेस को सीमित करने का कदम उठाया था। अब अन्य देशों पर दबाव बनाकर ताइवान के राष्ट्रपति की उड़ान तक रोक दी गई है। ताइवान के राष्ट्रपति ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया चीन की इस रणनीति को देख रही है और इससे बीजिंग को कोई खास फायदा नहीं होगा।
‘वन चाइना पॉलिसी’ का असर
मेडागास्कर के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने साफ कहा कि उनका देश सिर्फ चीन को मान्यता देता है, इसलिए ताइवान के राष्ट्रपति को अनुमति नहीं दी गई। यह बयान वन चाइना पॉलिसी की झलक दिखाता है, जिसके तहत कई देश ताइवान को अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देते।
ताइवान की बढ़ती घेराबंदी
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन अब ताइवान को चारों तरफ से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।
- अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि चीन 2027 तक ताइवान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
- चीन लगातार सैन्य अभ्यास कर रहा है और एयरस्पेस कंट्रोल बढ़ा रहा है।
- हाल ही में 40 दिनों तक ताइवान के आसपास एयरस्पेस प्रतिबंध भी लगाया गया।
कूटनीतिक और राजनीतिक चालें
चीन सिर्फ सैन्य दबाव ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी अपना रहा है। हाल ही में शी जिनपिंग ने ताइवान के विपक्षी नेता चेंग ली वुन को बीजिंग बुलाया। इस मुलाकात में उन्होंने दोहराया कि ताइवान, चीन का हिस्सा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन ताइवान की आंतरिक राजनीति में प्रभाव बढ़ाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक असर और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ ताइवान तक सीमित नहीं है। दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है। चीन की नजर आने वाले समय में बड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी है, जिसमें अमेरिका के साथ संभावित बातचीत शामिल है।
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