French Riots Viral Video: फ्रांस के दंगों के दौरान एक दुकान में लूटपाट की कोशिश का वीडियो वायरल हो रहा है। एक चीनी ग्लास कंपनी ने इस वीडियो को अपने न टूटने वाले शीशे के विज्ञापन के तौर पर इस्तेमाल किया है, जिसकी इंटरनेट पर खूब चर्चा हो रही है।
Chinese Glass Company: फ्रांस में अक्टूबर में हुए दंगों के दौरान एक दुकान के शीशे का वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में लोग शीशा तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह टूटता नहीं है। अब चीन की एक ग्लास कंपनी ने इसे अपना मार्केटिंग टूल बना लिया है। हेनान प्रांत की 'हेंगक्सिनफेंग स्पेशल-ग्लास कंपनी लिमिटेड' ने कोई नया विज्ञापन बनाने के बजाय, लूटपाट की इस नाकाम कोशिश के वीडियो का इस्तेमाल अपने मजबूत शीशे का प्रचार करने के लिए किया है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि शीशे पर दरारें तो आ गईं, लेकिन लोगों के बार-बार वार करने के बावजूद वह टूटा नहीं। बताया जा रहा है कि यह क्लिप फ्रांस में शिक्षा और बढ़ती महंगाई को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान रिकॉर्ड की गई थी। इसी प्रदर्शन की आड़ में जमकर लूटपाट भी हुई थी।
चीनी कंपनी का इस क्लिप को विज्ञापन की तरह इस्तेमाल करने का आइडिया इंटरनेट पर छा गया है। लोग शीशे की मजबूती और कंपनी के इस अजीबोगरीब मार्केटिंग तरीके की खूब चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोगों को यह मार्केटिंग स्टंट बहुत पसंद आया, जबकि कई लोगों ने कंपनी के दावों पर सवाल भी उठाए हैं।
यह फुटेज फ्रांस में हुए भारी बवाल के बीच का है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अक्टूबर को पेरिस और दूसरे शहरों में दंगे भड़क गए थे। इस दौरान करीब 3,000 दुकानों पर हमला हुआ और कई जगह लूटपाट की गई। व्यापारिक संगठनों का अनुमान है कि इस बवाल में करोड़ों यूरो का नुकसान हुआ है।
यहां देखें वायरल वीडियो
यह हिंसा तब भड़की जब बढ़ती महंगाई के विरोध में पूरे देश में पांच लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए थे। इसे फ्रांस में पिछले कई सालों में हुआ सबसे भयानक उपद्रव माना जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को अपील की कि 17 अक्टूबर जैसी लूटपाट और तोड़फोड़ दोबारा "कभी नहीं" होनी चाहिए। दरअसल, इस बवाल को न संभाल पाने के कारण उनकी सरकार पर भारी दबाव है। राष्ट्रपति चुनाव से ठीक छह महीने पहले हुए इन प्रदर्शनों ने मैक्रों को हटाने की मांग भी तेज कर दी है। अधिकारियों ने भी माना है कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चूक के कारण ही दंगे, लूटपाट और सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। इसके बाद अगले शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के लिए सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई थी।




