CJP संस्थापक अभिजीत दिपके 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा हुए। लेकिन सौरभ दास और आशुतोष रांका अब भी जेल में हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन दोनों को अब तक जमानत क्यों नहीं मिली?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार को 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा कर दिया गया। उन्हें शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने से पहले हिरासत में लिया गया था। वहीं, CJP के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका 5 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी हिरासत पर रविवार को फैसला आने की उम्मीद है।
रांका-दास पर क्या बोले अभिजीत दिपके?
- रिहाई के बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सौरभ दास और आशुतोष रंका की तस्वीर साझा की।
- इसके साथ उन्होंने लिखा, “अब बस अपने भाइयों के आजाद होने का इंतजार है।”
- शनिवार को दिपके को मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया।
- उन्हें 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने और शांति भंग नहीं करने का लिखित आश्वासन देने का आदेश दिया गया।
- इसके बाद वह मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से बाहर आ गए। अधिकारियों के मुताबिक, दिपके की रिहाई की एक वजह यह थी कि वह मार्च के निर्धारित स्थान तक पहुंचे ही नहीं थे।
- इसके विपरीत, पुलिस का आरोप है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका प्रतिबंधों के बावजूद जंतर-मंतर पहुंच गए और अशांति फैलाने की कोशिश की।
BNSS की धाराओं के तहत हुई कार्रवाई
- पुलिस के अनुसार, दिपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने के एक नए मामले में गिरफ्तार किया गया था।
- धारा 170 संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ्तारी का अधिकार देती है, जबकि धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दे सकता है।
- 14 अक्टूबर को सौरभ दास, आशुतोष रंका और CJP के सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी इन्हीं प्रावधानों के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था।
- दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि शिंदे को 5,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और जमानतदार देने तथा छह महीने तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया।
- CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों पर बिना अनुमति प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए थे।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान 14 लोग हिरासत में
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को सौरभ दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर एक निजी संपत्ति के रास्ते जंतर-मंतर पहुंच गए थे। इससे पहले 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों की सूची से हटा दिया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के काम में बाधा डाली, जिसके बाद सभी
नेहा बोरा भी रिहा, SIR के खिलाफ प्रदर्शन जारी
- ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया।
- बोरा ने आरोप लगाया कि उन्हें मंडी हाउस से हिरासत में लेकर सुबह पांच बजे तक पुलिस स्टेशन में रखा गया। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की।
- SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर CJP, विपक्षी दल और छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं।
- प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया था। कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में सुरक्षा बढ़ाई गई और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई।
- दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली हुई है। बीजेपी ने विरोध प्रदर्शनों को विदेशी फंडिंग से संचालित और अराजकता फैलाने की कोशिश बताया है।








