CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' रैली से पहले हिरासत में लिया गया। एक हफ्ते में यह दूसरी बार पुलिस की कार्रवाई है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शुक्रवार 16 अक्टूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई दिल्ली में आयोजित होने वाली 'लहरा दो तिरंगा' रैली में शामिल होने के लिए निकलने से कुछ मिनट पहले हुई। एक सप्ताह के भीतर दिपके को दूसरी बार हिरासत में लिया गया है। इससे पहले भी उन्हें दिल्ली पहुंचने पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उस समय वह मुंबई से दिल्ली आए थे और उनका विमान उतरते ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में क्यों लिए गए?
- अभिजीत दिपके को शुक्रवार को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' रैली में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे।
- वह कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हैं और पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
- यह घटना दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है।
- CJP मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है।
- दिपके की हिरासत की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पार्टी के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा जारी है।
एक हफ्ते में दूसरी बार हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके
- अभिजीत दिपके को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हिरासत में लिया गया है। इससे पहले वह मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे।
- विमान के उतरते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।
- उस समय CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में कथित हेरफेर के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही थी।
- यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा था। CJP इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विरोध कर रही है।
- अभिजीत दिपके की दोबारा हिरासत की घटना ने दिल्ली में प्रस्तावित तिरंगा रैली को लेकर घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
सेंट्रल पार्क-राजीव चौक के आसपास लगाए गए CCTV कैमरे
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रस्तावित मार्च को देखते हुए सेंट्रल पार्क और राजीव चौक के अंदर तथा आसपास 10 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए थे। कनॉट प्लेस और पालिका बाजार में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। पुलिस की ओर से मार्च की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद इलाके में लोगों की भीड़ जुटने लगी है। प्रदर्शन में किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए करीब 6000 जवान तैनात किए गए हैं।








