AISA President Neha Bora: आइसा (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेहा ने कहा कि पुलिस आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव कर रही है और महिलाओं को पूरी रात कस्टडी में रखा जा रहा है।

Neha Bora Statement: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस पर जमकर निशाना साधा है। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि पुलिस आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे वे कोई बड़े अपराधी हों। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कस्टडी में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। पुलिस की हिरासत से छूटने के बाद उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में ये बातें कहीं। बता दें कि शुक्रवार शाम को कनॉट प्लेस में होने वाले एक विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस ने नेहा को एहतियातन हिरासत में लिया था।

नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि हर मुमकिन तरीके से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा सुलूक हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, "चाहे दिन हो या शाम, लोगों को इस तरह कैसे हिरासत में लिया जा सकता है? पूरी रात कस्टडी में रखने के बाद अगले दिन सुबह या शाम को छोड़ना, यह किस अधिकार के तहत सही है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात थाने में रखने की इजाजत है?"

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बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को हिरासत में लेने और छोड़ने के कानूनी नियमों का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर किसी भी व्यक्ति, खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर भी नेहा ने पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अराजकता फैलाई जा रही है। नेहा ने कहा कि असल में सरकार और पुलिस ही यह अराजकता और अफरातफरी फैला रही है। दिल्ली के लोग चैन की सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वहां उन्हें बैरिकेड्स और रुकावटें ही मिलती हैं। नेहा ने कहा कि सरकार पूरे देश में अफरातफरी का माहौल बना रही है, कृपया भारत के लोगों को बख्श दें।

नेहा बोरा ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाया जाए और एसआईआर (SIR) पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर ही इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकेंगे और उनके वोटिंग के अधिकार सुरक्षित हो पाएंगे। अपनी हिरासत के वक्त का जिक्र करते हुए बोरा ने बताया कि पुलिस वालों ने शुरुआत में उन्हें बोलने तक नहीं दिया और ना ही किसी वकील से बात करने दी। उनकी लीगल टीम को उनसे संपर्क करने के लिए 5-6 घंटे तक लगातार कोशिश करनी पड़ी, तब जाकर उन्हें मिलने दिया गया।