UP Election News: न्यूज़18 के एक सर्वे के मुताबिक, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी फिर से सत्ता में वापसी कर सकती है और योगी आदित्यनाथ लगातार तीसरी बार सीएम बन सकते हैं। जानिए चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा असर डालेंगे।
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच न्यूज़18 और पी-वैल्यू एनालिटिक्स के एक हालिया सर्वे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की दोबारा सत्ता में वापसी के संकेत दिए गए हैं। सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर प्रदेश की कमान संभाल सकते हैं। हालांकि, ये आंकड़े सर्वे में शामिल लोगों की राय पर आधारित हैं, चुनाव के अंतिम नतीजे नहीं।
सर्वे में NDA को कितने प्रतिशत लोगों का समर्थन?
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 66.6 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के प्रति समर्थन जताया है। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस गठबंधन को 26.4 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पक्ष में 5.4 प्रतिशत लोगों ने अपनी राय दी।
जब लोगों से पूछा गया कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद किसकी सरकार बन सकती है, तो 66.6 प्रतिशत प्रतिभागियों ने NDA की वापसी की संभावना जताई। दूसरी ओर, 26.5 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आ सकता है।
कानून व्यवस्था और रोजगार होंगे बड़े चुनावी मुद्दे
- सर्वे में मतदाताओं से उन मुद्दों के बारे में भी पूछा गया, जो आगामी विधानसभा चुनाव में उनके फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें कानून व्यवस्था सबसे अहम मुद्दे के रूप में सामने आई।
- करीब 33.4 प्रतिशत लोगों ने कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी। वहीं, 21.4 प्रतिशत लोगों के लिए रोजगार और नई नौकरियां महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। महंगाई को 19.2 प्रतिशत लोगों ने अहम बताया।
- इसके अलावा, 10.4 प्रतिशत लोगों ने पेपर लीक और जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण माना। वहीं, 5.1 प्रतिशत लोगों ने किसानों की स्थिति को वोट देने के फैसले में अहम बताया।
2027 के चुनाव पर रहेंगी सबकी नजरें
सर्वे के आंकड़े फिलहाल NDA की बढ़त की ओर इशारा करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर चुनाव तक बदल सकती है। विपक्षी दलों की रणनीति, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताएं चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती हैं। असली तस्वीर विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।






