CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की आजीविका को लेकर चिंता जताई। नुकसान होने पर मुआवजे पर विचार के संकेत दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। कोर्ट ने कहा कि विरोध करने के अधिकार और छोटे दुकानदारों व दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की ओर से कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

कनॉट प्लेस में व्यापारियों को रोजाना कितने करोड़ का नुकसान?

  • सुनवाई के दौरान व्यापारियों की ओर से पेश हुए वकील जय अनंत देहाद्रई ने कनॉट प्लेस और उसके आसपास लगाए गए प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया।
  • उन्होंने दावा किया कि इलाके में हो रही रुकावटों के कारण हर दिन 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी पाबंदियों का असर केवल बड़े व्यापारियों पर नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है।
  • व्यापारियों की ओर से दलील दी गई कि सेंट्रल पार्क बंद होने और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही पर पाबंदियां लगने से कारोबार प्रभावित हो सकता है।
  • इससे उन लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ने की आशंका है, जो रोजाना की कमाई पर निर्भर हैं।

व्यापारियों को नुकसान हुआ तो मिल सकता है मुआवजा

  • व्यापारियों की दलीलों पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यदि कारोबार को नुकसान होता है या याचिकाकर्ताओं के साथ कोई गैरकानूनी कार्रवाई होती है, तो अदालत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकती है।
  • उन्होंने व्यापारियों की ओर से पेश वकील जय अनंत देहाद्रई से कहा, "अगर व्यापार का नुकसान होता है, या आपके मुवक्किलों के साथ कुछ गैर-कानूनी होता है, तो हम 'कॉन्स्टिट्यूशनल टॉर्ट ज्यूरिसडिक्शन' (संवैधानिक अपकृत्य अधिकार क्षेत्र) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे।
  • जब ऐसी स्थिति आएगी, तब उस पर विचार किया जाएगा।" हालांकि, अदालत ने फिलहाल मुआवजा देने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
  • उसने कहा कि जरूरत पड़ने पर परिस्थितियों के अनुसार इस पर विचार किया जाएगा।
  • कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि प्रदर्शनकारी, व्यापारी और प्रशासन मिलकर ऐसा रास्ता निकालेंगे, जिससे सभी के हितों की रक्षा हो सके। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियों के कारण व्यापारियों और मजदूरों की आजीविका को गंभीर नुकसान होता है, तो वह मुआवजा देने का आदेश भी दे सकता है।
  • कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 या 27 अक्टूबर को करने का निर्देश दिया।

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों हो रहा प्रदर्शन?

  • प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर वे चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से शुक्रवार 16 अक्टूबर को राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने की अपील की है।
  • दिपके का आरोप था कि पार्टी के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका को तिरंगा फहराने के कारण जेल में डाल दिया गया है।
  • हालांकि, दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के पीछे पुलिस ने अलग आरोप बताए हैं।

सौरव दास और आशुतोष रांका पांच दिन की न्यायिक हिरासत में

CJP के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया और बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश किया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल का दर्जा वापस ले लिया था।