CJP तिरंगा मार्च के चलते कनॉट प्लेस में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। व्यापारियों ने रोज ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा किया। जानें NDMC, संभावित मुआवजे और 26 अक्टूबर की सुनवाई से जुड़ी पूरी जानकारी।

Supreme Court CJP Protest: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'तिरंगा मार्च' और NDMC द्वारा दिल्ली के कनॉट प्लेस में लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर प्रशासनिक पाबंदियों के चलते व्यापारियों को गैर-कानूनी तरीके से नुकसान हुआ, तो अदालत मुआवजा दिलाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने से नहीं झिझकेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने 'दिल्ली किराना कमिटी' और 'दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन' की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। आइए जानते हैं इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें:

Supreme Court CP Protest: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और फैसले के मुख्य बिंदु

  • मुआवजे पर कोर्ट का सख्त रुख: जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अगर NDMC के आदेश जरूरत से ज्यादा पाबंदी लगाने वाले और गैर-कानूनी पाए गए, तो कोर्ट 'कॉन्स्टिट्यूशनल टॉर्ट ज्यूरिसडिक्शन' और 'पब्लिक लॉ' के तहत व्यापारियों को मुआवजा देने का आदेश जारी कर सकती है।
  • रोजाना 200 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा: व्यापारियों की ओर से पेश हुए वकील जय अनंत देहादराई ने कोर्ट को बताया कि त्योहारी सीजन में कनॉट प्लेस बंद रहने से कारोबारियों को हर दिन 200 करोड़ रुपये तक की व्यापारिक चपत लग सकती है।
  • छोटे दुकानदारों की आजीविका की चिंता: CJI सूर्य कांत ने कहा कि त्योहारों के वक्त ही छोटे कारोबारी अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। ऐसी पाबंदियों से उनके परिवारों पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे।
  • 26 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का फैसला सुनाया है।
  • दिल्ली हाई कोर्ट में भी मामला लंबित: कोर्ट ने याद दिलाया कि इसी तरह की याचिकाएं हाई कोर्ट में भी चल रही हैं, जहां विरोध प्रदर्शन, पुलिस व्यवस्था और रेहड़ी-पटरी वालों के अधिकार आपस में जुड़े हुए हैं।