Cockroach Janata Party: CJP की तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस का नोटिस मिला। जानें DP एक्ट की धारा 29 में जुलूस और प्रदर्शन को लेकर क्या अधिकार हैं।
CJP Tiranga Yatra: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तिरंगा यात्रा से पहले दिल्ली पुलिस की एक टीम NCP-SCP के प्रवक्ता अनीश गवांडे के घर पहुंची। अभिजीत दिपके यहीं पर ठहरे हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट (DP Act) के तहत नोटिस जारी किया है। यह घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस मामले में दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 की धारा 29 चर्चा में है।
Delhi Police Act Section 29: पुलिस को क्या अधिकार हैं?
- दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 की धारा 29 के तहत पुलिस कमिश्नर और इंस्पेक्टर से ऊपर के रैंक के अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को मौखिक या लिखित निर्देश दे सकते हैं। हालांकि, ऐसे निर्देश कानून के दायरे में होने चाहिए।
- इस प्रावधान के तहत पुलिस जुलूसों और सभाओं में शामिल लोगों की गतिविधियों को नियंत्रित कर सकती है।
- इसके अलावा, जुलूस के रास्ते और समय तय करने तथा सार्वजनिक स्थानों पर अवरोध रोकने के लिए भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
जुलूस, सभा और सार्वजनिक स्थानों पर नियंत्रण
- धारा 29 के तहत पुलिस को सार्वजनिक जुलूसों और सभाओं के दौरान व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है।
- यदि किसी रैली या प्रदर्शन से यातायात बाधित होने या आम लोगों को परेशानी होने की आशंका है, तो पुलिस उसके रास्ते और समय को लेकर निर्देश दे सकती है।
- इस धारा के तहत सड़कों, मेलों, मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, चर्चों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं।
- इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और लोगों की आवाजाही को सुचारु रखना है।
लाउडस्पीकर और शोर पर भी कंट्रोल
- दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 29 पुलिस को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर संगीत, गाने, ढोल तथा शोर करने वाले अन्य उपकरणों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने का अधिकार भी देती है।
- इसके अलावा, रिहायशी इलाकों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
- पुलिस इस धारा के तहत अपने निर्देशों को लागू करने के लिए जरूरी कदम भी उठा सकती है।
जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के प्रदर्शन पर क्या असर?
- CJP की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा और जंतर-मंतर व कनॉट प्लेस में विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में धारा 29 महत्वपूर्ण है।
- इसके तहत पुलिस जुलूसों के रास्ते, समय, भीड़ और सार्वजनिक स्थानों पर रुकावटों को नियंत्रित करने के लिए निर्देश जारी कर सकती है।
- हालांकि, इस धारा का मतलब यह नहीं है कि पुलिस किसी भी प्रदर्शन पर बिना शर्त प्रतिबंध लगा सकती है।
- इसी तरह, केवल धारा 29 के आधार पर जंतर-मंतर को स्थायी रूप से प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का अधिकार भी स्वतः नहीं मिल जाता।
- ऐसे कदमों की वैधता का आकलन संबंधित आदेश, लागू अन्य कानूनों और अदालतों के निर्देशों के आधार पर करना होगा।
- इसलिए अभिजीत दिपके को जारी नोटिस के मामले में यह देखना जरूरी है कि पुलिस ने किस आधार पर और किन शर्तों के तहत निर्देश दिए हैं।
- केवल नोटिस जारी होने से उसकी वैधता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।








