CJP Protest: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कथित अनधिकृत प्रवेश और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में 14 सदस्यों के खिलाफ दो FIR दर्ज कीं। सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि अजिंक्य शिंदे पर छह महीने की पाबंदी लगाई गई। जानें FIR की धाराएं, अजिंक्य शिंदे पर कार्रवाई और पूरा विवाद।
नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदर्शनों के नए नियमों और पाबंदियों के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 14 सदस्यों पर जंतर-मंतर पर बिना इजाजत घुसने और पुलिस के काम में बाधा डालने को लेकर दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि पार्टी के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार के लिए पाबंद किया गया है। इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि हाल ही में दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की तय जगहों की सूची से हटा दिया है।
CJP Protest: जंतर-मंतर पर क्या हुआ?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को CJP के 14 सदस्य कथित तौर पर एक निजी जगह से होते हुए जंतर-मंतर पहुंचे। वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और सरकारी काम में बाधा डाली। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई।
दिल्ली पुलिस की 2 FIR में कौन-सी धाराएं?
- कनॉट प्लेस थाना: FIR नंबर 289/26 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(a), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई।
- पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना: FIR नंबर 128/26 में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) लगाई गईं।
- पुलिस के अनुसार, मामले कथित अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने सहित अन्य आरोपों से जुड़े हैं।
सौरव दास और आशुतोष रंका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत, भेजे गए तिहाड़ जेल
दिल्ली पुलिस ने बताया कि दास, रंका और अजिंक्य शिंदे को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया। इनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्यवाही शुरू की गई। पुलिस ने दोबारा कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है। वहीं, शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार का मुचलका भरने का निर्देश दिया गया। इसके लिए 5,000 रुपये के निजी बॉन्ड और जमानत की शर्त बताई गई।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने दास और रंका को हिरासत में भेजे जाने की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि दोनों को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया। यह उनका आरोप है; पुलिस ने मामले में अनधिकृत प्रवेश और सरकारी काम में बाधा डालने की बात कही है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से क्यों हटाया गया?
11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय जगहों के तौर पर अधिसूचित किया था। इसके बाद जंतर-मंतर को इस सूची से हटा दिया गया। CJP ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे राजधानी के राजनीतिक केंद्र में विरोध दर्ज कराने की गुंजाइश सीमित होगी। 13 अक्टूबर की कार्रवाई इसी विवाद के बीच हुई।


