दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट से सियासी हलचल तेज, 18 मेट्रो स्टेशन बंद। सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद नए सवाल, जबकि PM मोदी ने NEET पेपर लीक पर और सख्त कार्रवाई का संकेत दिया।
नई दिल्ली: देश की राजधानी इस वक्त एक अभूतपूर्व सियासी और सामाजिक उबाल के मुहाने पर खड़ी है। नीट (NEET) पेपर लीक का मामला अब सिर्फ एक परीक्षा का विवाद नहीं रहा, बल्कि इसने एक ऐसे जन-आंदोलन का रूप ले लिया है जिसने दिल्ली की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जंतर-मंतर पर छात्रों का गुस्सा फूट रहा है, वहीं दूसरी तरफ 26 दिनों से अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अचानक अनशन खत्म करने के फैसले ने पूरी कहानी में एक रहस्यमयी मोड़ ला दिया है। आखिर पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ जिसने सरकार को झुकने पर मजबूर किया और दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया?
18 मेट्रो स्टेशन बंद और रात 8 बजे शराबबंदी: क्या दिल्ली में इमरजेंसी जैसे हालात हैं?
शनिवार की सुबह दिल्ली वालों के लिए एक बड़े झटके के साथ शुरू हुई। व्यंग्यात्मक राजनीतिक समूह, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चल रहे उग्र प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने आनन-फानन में नई दिल्ली इलाके के 18 मेट्रो स्टेशनों के कपाट बंद कर दिए। छात्र सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं। तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली पुलिस के इनपुट पर सरकार ने वीकेंड पर शराब की दुकानों को रात 10 बजे के बजाय रात 8 बजे ही बंद करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। CJP का दावा है कि केंद्र सरकार ने इस गतिरोध को सुलझाने और इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का वक्त मांगा है। टिक-टिक करती घड़ी के बीच हर कोई यह सोच रहा है कि दोपहर बाद क्या होने वाला है?
क्या वांगचुक और सरकार के बीच कोई 'डील' हुई?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस गुरुवार की देर रात गुरुग्राम के मेदांताअस्पताल में बना। पिछले 26 दिनों से अन्न का एक दाना त्यागे बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अचानक अपना अनशन खत्म करने का एलान कर दिया। चौंकाने वाली बात यह थी कि उनके बेड के पास देश के दो कद्दावर केंद्रीय मंत्री-जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद थे। जैसे ही यह खबर बाहर आई, सोशल मीडिया पर आरोपों का बाजार गर्म हो गया। क्या वांगचुक ने सरकार के साथ कोई गुप्त समझौता कर लिया है? शुक्रवार देर रात जारी एक 24 मिनट के चौंकाने वाले YouTube वीडियो में खुद वांगचुक ने इन कयासों पर से पर्दा उठाया। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने यह कदम तब उठाया जब सरकार ने तीन लिखित आश्वासन दिए:
- जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
- आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा मिलेगा।
- संसद के पटल पर पेपर लीक मामले पर खुली और विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
"अंगों को हुआ ऐसा नुकसान जो शायद ठीक न हो": अस्पताल के बिस्तर से भावुक हुंकार
आलोचकों और 'डील' के आरोपों पर पलटवार करते हुए बेहद कमजोर दिख रहे सोनम वांगचुक ने अस्पताल के बिस्तर से इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज जारी किया। उनके शब्दों में गुस्सा और लाचारी दोनों साफ झलक रही थी। वांगचुक ने भावुक होते हुए पूछा: "26 दिन तक भूखे रहने के बाद, क्या अब मुझे इस बात का कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था? अगर कोई सौदा करना होता, तो क्या मैं किसी आलीशान एयर-कंडीशंड कमरे में नहीं बैठ सकता था, बजाय इसके कि दिल्ली की तपती गर्मी में सड़क किनारे जान दांव पर लगानी पड़े?"
इस अनशन ने वांगचुक के शरीर को लगभग बर्बाद कर दिया है। उनका 11 किलो वजन कम हो चुका है। उन्होंने डॉक्टरों के हवाले से बताया कि उनकी मांसपेशियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं और उनके अंगों तथा दिमाग को ऐसा गंभीर नुकसान पहुंचा है जो शायद कभी पूरी तरह ठीक न हो पाए।
पीएम मोदी का 'और सख्त कार्रवाई' का वादा: क्या थमेगा छात्रों का गुस्सा?
एक तरफ जहां दिल्ली की सड़कों पर संग्राम छिड़ा है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले पर सीधे मोर्चा संभाल लिया है। पेपर लीक के खिलाफ सरकार की मंशा साफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा: "पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है। यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बहुत दुखद है। इसीलिए पिछले ढाई महीनों में कई कड़े कदम उठाए गए हैं और आने वाले दिनों में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।" प्रधानमंत्री के इस भरोसे और सरकार के लिखित आश्वासनों के बाद गेंद अब छात्रों और CJP के पाले में है। लेकिन 18 बंद मेट्रो स्टेशन और भारी पुलिस बल की तैनाती चीख-चीख कर कह रही है कि जब तक दोपहर की समय-सीमा खत्म नहीं होती, तब तक दिल्ली पर मंडरा रहा यह सस्पेंस खत्म होने वाला नहीं है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ता दबाव
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर कोई निर्णायक कदम उठाएगी या विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप लेगा। जंतर-मंतर पर जुटी भीड़, राजधानी में कड़ी सुरक्षा, मेट्रो स्टेशनों का बंद होना और सोनम वांगचुक के भावुक संदेश ने इस आंदोलन को केवल एक छात्र विरोध तक सीमित नहीं रहने दिया है। फिलहाल दिल्ली की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां इसी घटनाक्रम के इर्द-गिर्द घूम रही हैं। सरकार की अगली घोषणा और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। आने वाले कुछ घंटे यह तय कर सकते हैं कि यह आंदोलन समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर देशव्यापी बहस और राजनीतिक टकराव का नया अध्याय शुरू होगा।


