योगी कैबिनेट ने पारिवारिक संपत्ति दान पर स्टाम्प शुल्क छूट का दायरा बढ़ाया। अब कृषि, आवासीय के साथ कॉमर्शियल व औद्योगिक संपत्ति पर भी केवल ₹5,000 शुल्क लगेगा। साथ ही GCC नियमावली-2025 को मंजूरी मिली।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश में अब परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान (Gift Deed) पर मिलने वाली स्टाम्प शुल्क छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है। इस फैसले से अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी केवल नाममात्र का स्टाम्प शुल्क देना होगा।

अब तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत दान विलेख पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार स्टाम्प शुल्क लगता था और रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के अनुसार इसका पंजीकरण अनिवार्य था। नए निर्णय से पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण आसान और किफायती हो जाएगा।

दान विलेख पर स्टाम्प शुल्क अब अधिकतम ₹5,000

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के अनुसार, यदि अचल संपत्ति परिवार के सदस्यों के नाम दान की जाती है तो स्टाम्प शुल्क अधिकतम ₹5,000 तय किया गया था। यह छूट अब तक केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी।

योगी कैबिनेट ने अब इस छूट को व्यावसायिक (Commercial) और औद्योगिक (Industrial) संपत्तियों पर भी लागू करने का निर्णय लिया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति का कानूनी हस्तांतरण कम खर्च में संभव होगा।

शहरी और ग्रामीण कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर समान लाभ

प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2022 से पहले पारिवारिक दान पर पूरे सर्किल रेट के अनुसार स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था। योगी सरकार ने 2022 में इसे ₹5,000 फिक्स कर दिया, लेकिन यह सुविधा केवल कृषि और आवासीय संपत्ति तक सीमित थी।

अब शहर और गांव, दोनों क्षेत्रों में स्थित कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी केवल ₹5,000 स्टाम्प शुल्क देना होगा। पहले शहरी क्षेत्रों में 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लगता था।

नियमों में स्पष्टता, गजट के साथ लागू होगा फैसला

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पहले जारी अधिसूचना में शामिल पारिवारिक संबंधों की परिभाषा और अन्य प्रावधानों को और स्पष्ट किया गया है। इससे नियमों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा। यह निर्णय संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होते ही लागू हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पारिवारिक संपत्ति से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।

कुशीनगर और झांसी में नए उप निबंधक कार्यालयों को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े दो अन्य प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। कुशीनगर जिले की तहसील कप्तानगंज में उप निबंधक कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 0.0920 हेक्टेयर भूमि नि:शुल्क आवंटित की गई है। वर्तमान में कार्यालय जर्जर भवन में संचालित है, जिसे हटाकर नया भवन बनाया जाएगा।

इसी तरह झांसी में उप निबंधक सदर कार्यालय और अभिलेखागार के निर्माण के लिए 0.0638 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया है। दोनों मामलों में भूमि सरकारी होने के कारण स्टाम्प और पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट दी जाएगी।

GCC नीति-2024 के लिए नियमावली-2025 को मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 को मंजूरी दी गई। इस नियमावली के तहत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह नियमावली नीति के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी और संशोधन या समाप्ति तक लागू रहेगी।

यूपी में जीसीसी निवेश को मिल रही रफ्तार

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 21 कंपनियों ने जीसीसी के तहत निवेश शुरू किया है। जीसीसी इकाइयाँ आईटी, आरएंडडी, फाइनेंस, एचआर, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में काम करेंगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

जीसीसी इकाइयों को मिलेंगे व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन

नियमावली के तहत जीसीसी इकाइयों को फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट या प्रतिपूर्ति, पूंजीगत और ब्याज सब्सिडी, ओपेक्स सब्सिडी, पेरोल व भर्ती प्रोत्साहन, ईपीएफ प्रतिपूर्ति और कौशल विकास सहायता दी जाएगी। इसके अलावा तकनीकी सहायता, इंडस्ट्री लिंकेज, नियामक सहयोग और त्वरित अनुमोदन जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

यूपी को ग्लोबल सर्विस हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि जीसीसी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह फैसला प्रदेश को वैश्विक सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।