जयपुर में रिलायंस रिटेल को बिस्किट पर 1.80 रुपये ज़्यादा वसूलने पर उपभोक्ता अदालत ने 5,500 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने विज्ञापित छूट न देने को गलत व्यापारिक प्रैक्टिस माना।

जयपुर: कभी-कभी छोटी सी रकम भी बड़ी मुसीबत बन जाती है। ऐसा ही कुछ रिलायंस रिटेल के साथ हुआ, जिसे बिस्किट के एक पैकेट पर सिर्फ 1।80 रुपये ज़्यादा वसूलना बहुत महंगा पड़ गया। राजस्थान की एक कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला जयपुर का है। यहां एक ग्राहक से पतंजलि बिस्किट के पैकेट पर ऑफर में बताई गई कीमत से 1।80 रुपये ज़्यादा ले लिए गए थे। जब जयपुर डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम ने ग्राहक के हक में फैसला सुनाया, तो रिलायंस रिटेल ने इसे स्टेट कमीशन में चुनौती दी। लेकिन स्टेट कमीशन ने भी रिलायंस की अपील खारिज कर दी और ग्राहक को 5,500 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। यह फैसला ज्यूडिशियल मेंबर मुकेश और रामनिवास सारस्वत की बेंच ने सुनाया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना जनवरी 2021 की है। रिलायंस रिटेल ने एक न्यू ईयर प्रमोशन कैंपेन चलाया था, जिसमें स्टोर्स पर भारी डिस्काउंट का विज्ञापन किया गया था। इन विज्ञापनों को देखकर एक युवक रिलायंस के आउटलेट पर पहुंचा और 276।50 रुपये का किराने का सामान खरीदा। जब उसने बिल चेक किया, तो पाया कि 30 रुपये वाले पतंजलि बिस्किट के पैकेट पर विज्ञापन में बताया गया 6% का डिस्काउंट नहीं दिया गया है।

ऑफर के हिसाब से बिस्किट की कीमत 28।20 रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन कंपनी ने पूरे 30 रुपये वसूल लिए। ग्राहक ने जब स्टोर के कर्मचारियों से इस 1।80 रुपये के अंतर के बारे में बात की और पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद, अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट जाने का फैसला किया।

रिलायंस ने कोर्ट में क्या कहा?

कोर्ट में रिलायंस रिटेल ने अपना बचाव करने की कोशिश की। कंपनी की मुख्य दलील थी कि पतंजलि बिस्किट का यह पैकेट उनके न्यू ईयर डिस्काउंट ऑफर का हिस्सा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहक ने स्टोर पर ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी, इसलिए उनकी तरफ से सेवा में कोई कमी या गलत व्यापारिक प्रैक्टिस नहीं हुई। रिलायंस ने अपनी अपील में यह भी कहा कि सिर्फ 1।80 रुपये के लिए 10,000 रुपये का मानसिक पीड़ा का मुआवजा बहुत ज़्यादा है।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने रिलायंस की दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कमीशन ने कहा कि कंपनी ने अपने विज्ञापनों में 6% डिस्काउंट देने की बात से इनकार नहीं किया है। साथ ही, रिलायंस ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि पतंजलि बिस्किट इस ऑफर से बाहर थे। ग्राहक द्वारा पेश की गई तस्वीरों और विज्ञापनों में 6% की छूट साफ दिख रही थी।

कमीशन ने स्पष्ट किया कि विज्ञापन देखकर सामान खरीदने आए ग्राहक को वादा किया गया फायदा न देना गैरकानूनी है। हालांकि, कमीशन ने माना कि मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये की रकम इस मामले को देखते हुए थोड़ी ज़्यादा है। इसलिए, इसे घटाकर 500 रुपये कर दिया गया। लेकिन, कंपनी की गलत व्यापारिक प्रैक्टिस के लिए कोर्ट ने मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये और ज़्यादा वसूले गए 1।80 रुपये मिलाकर कुल 5,501।80 रुपये ग्राहक को देने का आदेश दिया।