जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से निवासियों को हो रही परेशानी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया है। कोर्ट ने प्रदर्शनों को रामलीला मैदान जैसी बड़ी जगह पर शिफ्ट करने का सुझाव दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।

नई दिल्लीः दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक सीधा और कड़ा सवाल पूछा है। जस्टिस महाजन ने सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा से कहा, "आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते?" कोर्ट यह सुनवाई जंतर-मंतर रोड के एक निवासी की याचिका पर कर रहा था, जो प्रदर्शनों से होने वाली परेशानियों से तंग आ चुके हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में बताया था कि प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के कारण वहां लगभग हर दिन हंगामा होता है। याचिका के मुताबिक, प्रदर्शनकारी कई बार महीनों या सालों तक वहां डेरा डाले रहते हैं। इस दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने, खुले में खाना पकाने और कपड़े धोने से स्थानीय निवासियों का रहना मुश्किल हो गया है।

कोर्ट की दो टूक- रिहायशी इलाके में प्रदर्शन क्यों?

सुनवाई के दौरान जस्टिस महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि जंतर-मंतर एक रिहायशी इलाका है। उन्होंने ASG शर्मा से पूछा कि सरकार इन प्रदर्शनों को किसी बड़ी जगह पर क्यों नहीं शिफ्ट कर देती। कोर्ट ने विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसी जगहों का सुझाव भी दिया। अदालत के सवालों के जवाब में ASG चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर "सक्रिय रूप से विचार" कर रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पहले ही आ चुका है। ज़ाहिर है, सरकार को इस समस्या की जानकारी तो है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। फिलहाल, हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 जुलाई की तारीख तय की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि अगली सुनवाई में केंद्र सरकार अदालत के सवालों का क्या जवाब देती है।