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PM Modi 76: जब पुलिस के सामने से भेष बदलकर निकल जाते थे मोदी, जानिए अंडरग्राउंड रहने की इनसाइड स्टोरी
PM Modi Underground Struggle Story: आज पीएम मोदी 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। दुनिया उन्हें ताकतवर ग्लोबल लीडर मानती है, लेकिन 1975 की इमरजेंसी में गिरफ्तारी से बचने के लिए भेष बदलकर पुलिस की आंखों में धूल झोंकते थे। जानिए अंडरग्राउंड की पूरी कहानी…

1975 का वो दौर, जब मोदी की अचानक बदल गई जिंदगी
बात जून 1975 की है, जब देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा हुई और विपक्षी नेताओं को जेलों में ठूंस दिया गया। उसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी प्रतिबंध लग गया। उस समय नरेंद्र मोदी करीब 25 साल के नौजवान प्रचारक थे। संगठन ने उन्हें 'गुजरात लोक संघर्ष समिति' का जनरल सेक्रेटरी बनाया, जिसका काम सरकार के खिलाफ भूमिगत आंदोलन चलाना था। पुलिस हर जगह संघ के कार्यकर्ताओं की तलाश में छापे मार रही थी, ऐसे में मोदी को किसी भी हाल में गिरफ्तारी से बचकर नेटवर्क संभालना था।

कभी संन्यासी तो कभी सिख बने, पुलिस को भनक तक नहीं लगी
अंडरग्राउंड रहते हुए मोदी की सबसे बड़ी चुनौती थी एक जगह से दूसरी जगह संदेश पहुंचाना और बैठकें करना। पकड़े जाने के खतरे को भांपते हुए उन्होंने अपना रूप बदलने का फैसला किया। वे कभी गेरुआ वस्त्र पहनकर संन्यासी बन जाते, जिससे पुलिस उन पर शक भी नहीं कर पाती थी। कई बार उन्होंने लंबी दाढ़ी, पगड़ी और पारंपरिक सिख पोशाक पहनकर सफर किया। चेहरे और पहनावे के इस बदलाव की वजह से खुफिया पुलिस उनके बिल्कुल करीब से गुजर जाती थी, लेकिन उन्हें पहचान नहीं पाती थी।
साइकिल, सीक्रेट ठिकाने और प्रतिबंधित साहित्य की डिलीवरी
उस दौर में फोन या इंटरनेट जैसी सुविधाएं नहीं थीं। सारा तालमेल पर्चियों, कोडवर्ड और सीक्रेट मुलाकातों पर टिका था। नरेंद्र मोदी अक्सर साइकिल या सामान्य बसों में सफर करते थे। वे जेल में बंद नेताओं के परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाते और सरकार विरोधी पत्रिकाओं और पोस्टरों को चोरी-छिपे प्रिंट कराकर अलग-अलग शहरों में बंटवाते थे। इस दौरान उन्होंने गुजरात के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत की, जिसने बाद में उनके संगठन कौशल की नींव रखी।
1978 में मिली बड़ी जिम्मेदारी, वहीं से गढ़ी गई भविष्य की राजनीति
इमरजेंसी खत्म होने के बाद 1978 में उन्हें सूरत और वडोदरा का संभाग प्रचारक बनाया गया। भूमिगत आंदोलन के दौरान जिस तरह उन्होंने मुश्किल हालात में नेटवर्क को जोड़े रखा, उसने संगठन के बड़े नेताओं का ध्यान खींचा। 1987 में वे औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हुए और संगठन के पहिए को आगे बढ़ाया।
अंडरग्राउंड प्रचारक से 4,399 दिन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
1975 में पुलिस से छिपने वाले उस युवा प्रचारक का सफरनामा आज एक बड़े मुकाम पर पहुंच चुका है। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने और लगातार चार बार राज्य की कमान संभाली। 2014, 2019 और फिर 2024 में लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 10 जून 2026 को उन्होंने लगातार चुने गए प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे करके पंडित जवाहरलाल नेहरू (4,398 दिन) के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
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