- Home
- News
- PM Modi 76: एक RSS प्रचारक का सफर, कई मुश्किलें…11 PHOTO में वडनगर की गलियों से PMO तक की कहानी
PM Modi 76: एक RSS प्रचारक का सफर, कई मुश्किलें…11 PHOTO में वडनगर की गलियों से PMO तक की कहानी
PM Modi 76th Birthday: 76 साल के हुए पीएम नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफ़र कभी आसान नहीं रहा। RSS के दफ़्तर से लेकर इमरजेंसी में अंडरग्राउंड होने, 1990 के राजनीतिक वनवास और 2002 के संकट तक-जानिए कैसे हर चुनौती से पार पाकर वे देश के प्रधानमंत्री बने।

76 साल के हुए PM मोदी, कैसी रही पूरी यात्रा?
17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष के हो गए। परिवार की चाय की दुकान से शुरू हुआ उनका सार्वजनिक जीवन RSS के संगठनात्मक काम से होते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा।

चाय की दुकान से RSS प्रचारक का सफ़र
नरेंद्र मोदी ने जीवन की शुरुआत वडनगर की एक चाय दुकान से की। संघ में शामिल होने के बाद शुरुआती दिनों में उन्होंने दफ़्तर में झाड़ू लगाने और चाय-नाश्ता बनाने जैसे साधारण काम भी पूरी निष्ठा से किए।
1975 की इमरजेंसी और अंडरग्राउंड प्रतिरोध
जून 1975 में इमरजेंसी के दौरान RSS पर बैन लगा, तो 25 वर्षीय मोदी अंडरग्राउंड हो गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे कभी सिख तो कभी अलग-अलग रूप धारण कर इमरजेंसी विरोधी साहित्य बाँटते रहे।(फाइल फोटो:1975 के दौर की तस्वीर या प्रतीकात्मक रूप में भेष बदले हुए प्रचारक का चित्र।)
RSS में प्रचारक बनने का दौर
1970 के दशक की शुरुआत में मोदी RSS से जुड़े और 1972 में प्रचारक बने। संगठन में उनकी दिनचर्या और जिम्मेदारियां आगे बढ़ती गईं। इमरजेंसी के दौरान वे सरदार का भेष बनाकर काफी दिनों तक टहलते रहे।
1990 का दशक: संगठन की कमान और पहली बड़ी चुनौती
1990 के दशक में मोदी गुजरात बीजेपी के मुख्य रणनीतिकार बने। लेकिन सरकार और संगठन में बढ़ते प्रभाव के कारण पार्टी के भीतर मतभेद गहरे होते चले गए, जो आगे चलकर बड़े संकट में बदले। इसी दौर में डा. मुरली मनोहर जोशी के साथ नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर के लाल चौंक पर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया।
1995 की बगावत और गुजरात से ‘राजनीतिक वनवास’
केशुभाई सरकार के खिलाफ शंकरसिंह वाघेला के विद्रोह (खजुरिया-हजूरिया कांड) के बाद हुए समझौते में मोदी को भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें गुजरात छोड़कर दिल्ली-चंडीगढ़ में 18 महीने का वनवास काटना पड़ा।
2001 में गुजरात वापसी और मुख्यमंत्री पद की शपथ
2001 भुज भूकंप और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 7 अक्टूबर 2001 को मोदी ने पहली बार गुजरात के CM पद संभाला। बिना विधायक चुने कुर्सी पर बैठे मोदी के लिए पहली विधानसभा सीट खोजना भी एक बड़ा संघर्ष साबित हुआ था।
2002 के बाद गुजरात की राजनीति में बड़ा मोड़
2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा हुई और मोदी सरकार की भूमिका को लेकर तीखी राजनीतिक तथा कानूनी बहस चली। मोदी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन BJP नेतृत्व ने उन्हें पद पर बनाए रखा। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित दौर रहा।
'गुजरात मॉडल' से राष्ट्रीय पहचान तक
मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने विकास, निवेश और प्रशासन को अपनी सार्वजनिक राजनीति के प्रमुख हिस्से के तौर पर प्रस्तुत किया। Vibrant Gujarat जैसे आयोजनों के जरिए राज्य में निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया गया। 2012 में लगातार तीसरी विधानसभा जीत के बाद उनकी राष्ट्रीय भूमिका और स्पष्ट हुई।
2014 में PM, फिर लगातार तीसरी पारी
13 सितंबर 2013 को BJP ने नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद गुजरात की राजनीति से निकलकर उनका अभियान राष्ट्रीय चुनाव के केंद्र में आ गया। यह उनके संगठनात्मक सफर से राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का निर्णायक पड़ाव था। 2019 में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 9 जून 2024 को उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
76 साल का अटूट सफ़र: संकट ही बने अवसर
चाय की दुकान से लेकर विश्व के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शामिल होने तक, पीएम मोदी की कहानी दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की है। हर संकट को अवसर में बदलकर वे आज भी उसी जोश के साथ आगे बढ़ रहे हैं। 76वें साल में भी चुनौतियाँ कम नहीं रहीं। 2026 में वैश्विक मंदी, टैरिफ तनाव, मध्य-पूर्व युद्ध के साथ-साथ NEET पेपर लीक विवाद और UGC नियमों पर घरेलू विरोध का सरकार ने मजबूती से सामना किया।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

