UPI MDR पर राहुल गांधी के विरोध और कांग्रेस सांसदों के संसदीय रुख को समझिए। चिदंबरम और मनीष तिवारी समेत समिति की सिफारिश और नए शुल्क ढांचे की पूरी जानकारी।

भारत में UPI पेमेंट को लंबे समय तक बिना मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के चलाने की नीति रही है। अब इसके बढ़ते संचालन खर्च और सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता को लेकर बहस तेज हो गई है। वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अगस्त 2026 में UPI के लिए एक स्तरीय राजस्व मॉडल को जल्द लागू करने की जरूरत बताई।

वित्त समिति ने क्या सिफारिश की?

12 अगस्त 2026 को पेश रिपोर्ट में समिति ने कहा कि UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक सरकारी खजाने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। समिति ने उच्च-मूल्य वाले लेनदेन के लिए एक व्यवस्थित MDR व्यवस्था पर जोर दिया, ताकि साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रह सके। रिपोर्ट में ₹2,000 करोड़ के बजटीय आवंटन और उद्योग की अनुमानित ₹20,700 करोड़ की संचालन लागत के बीच अंतर भी उठाया गया।

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समिति में कांग्रेस के कौन-कौन से सांसद थे?

उपलब्ध समिति संरचना के अनुसार पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ समिति के सदस्यों में शामिल थे। आपके साझा किए गए विवरण के मुताबिक, 12 अगस्त को रिपोर्ट अपनाए जाने के समय ये पांचों कांग्रेस सांसद मौजूद थे और प्रकाशित कार्यवाही में कोई असहमति दर्ज नहीं थी। हालांकि, समिति की रिपोर्ट को समर्थन देना और MDR के हर संभावित प्रावधान का व्यक्तिगत रूप से समर्थन करना एक ही बात नहीं है। किसी सांसद के विशिष्ट सार्वजनिक रुख को समझने के लिए उनके बयान या अलग से दर्ज आपत्ति की जरूरत होगी।

राहुल गांधी के विरोध से क्यों उठे सवाल?

UPI पर शुल्क व्यवस्था को लेकर राहुल गांधी ने आलोचना की है। वहीं, संसदीय समिति ने डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता के लिए राजस्व मॉडल की जरूरत बताई थी। यहीं से राजनीतिक बहस का सवाल सामने आता है: क्या कांग्रेस के कुछ सांसदों का संसदीय रुख और राहुल गांधी की सार्वजनिक आलोचना अलग-अलग प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं?

इस अंतर का निश्चित कारण बताने के लिए राहुल गांधी और संबंधित सांसदों के विस्तृत बयानों की तुलना जरूरी है। केवल समिति में मौजूदगी और रिपोर्ट पर असहमति दर्ज न होने से व्यक्तिगत राजनीतिक मंशा निर्धारित नहीं की जा सकती।

UPI शुल्क का आम लोगों पर क्या असर होगा?

15 सितंबर 2026 को सरकार ने नए UPI फ्रेमवर्क की घोषणा की। इसके तहत चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू होगा, जबकि व्यक्तिगत ट्रांसफर और छोटे व्यापारियों के लिए सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं। सरकार के अनुसार, लगभग 96% मर्चेंट लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। इसलिए आगे की बहस का मुख्य मुद्दा यह रहेगा कि राजस्व मॉडल UPI की वित्तीय स्थिरता और छोटे कारोबारियों की लागत के बीच संतुलन कैसे बनाता है।

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