Delhi High Court ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि वे Gen Z नहीं हैं। कोर्ट ने वैकल्पिक कानूनी रास्ते पर सवाल उठाया। बाद में दोनों नेताओं को याचिका वापस लेने की अनुमति मिली। पूरी खबर पढ़ें।

Delhi High Court CJP Case: दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को एक दिलचस्प और गरमागरम सुनवाई देखने को मिली। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उम्र पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे 'जेन जेड' (Gen Z) की श्रेणी में नहीं आते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब दूसरे कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, तो सीधे हाई कोर्ट आने की जरूरत क्यों पड़ी। इसके बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने साफ किया कि उसकी टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष पर राय न माना जाए।

Delhi High Court News: ‘Gen Z’ पर कोर्ट ने क्या कहा?

  • बुधवार, 21 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान बेंच ने CJP नेताओं की उम्र पूछी। उनके वकील अभिक चिमनी ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रंका 32 साल के हैं।
  • ‘Gen Z’ का मतलब पूछने पर अदालत को बताया गया कि यह शब्द आम तौर पर 1997 के बाद जन्मे लोगों के लिए इस्तेमाल होता है।
  • इसके बाद कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस पीढ़ी में नहीं आते।
  • अदालत ने ‘सत्ता परिवर्तन’ का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता बदलने का रास्ता मतदान है।

CJP Leaders Detention: हिरासत को लेकर क्या है मामला?

  • दोनों नेताओं ने सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें एहतियाती हिरासत में रखा गया था। यह कार्रवाई जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत जगहों की सूची से हटाने के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद हुई।
  • दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर निजी संपत्ति के रास्ते जंतर-मंतर पहुंचे।
  • दास और रंका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में हिरासत की अवधि बढ़ा दी गई।
  • CJP की कानूनी टीम ने हिरासत को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की थी।

CJP Petition: हाई कोर्ट ने वैकल्पिक कानूनी रास्ते पर क्यों उठाया सवाल?

  • अदालत ने पूछा कि जब मामले की सुनवाई उसी दिन दोपहर 2 बजे SEM के सामने होनी थी, तो सीधे हाई कोर्ट आने की इतनी जल्दी क्यों थी। बेंच ने यह भी कहा कि संबंधित अदालत करीब दो किलोमीटर दूर है।
  • कोर्ट ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता पहले SEM के सामने चल रही कार्यवाही का नतीजा देखें और फिर कानून के तहत उपलब्ध विकल्प अपनाएं।
  • सुनवाई में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन, 11 अक्टूबर को जमा किए गए जमानत बॉन्ड और जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई किए जाने का भी उल्लेख हुआ।
  • अदालत ने सवाल किया कि यदि अधिकारियों के अनुसार फिर से शांति भंग होने की आशंका बनी, तो क्या दूसरी एहतियाती कार्रवाई में नई जमानत या मुचलके मांगे जा सकते हैं।

CJP Case Update: नेताओं ने वापस ली याचिका

सुनवाई के दौरान अदालत ने दास और रंका को याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां मामले के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं हैं। अब संबंधित कार्यवाही SEM के सामने आगे बढ़ेगी, जिसके बाद नेता कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।