CJP Case में सौरव दास और आशुतोष रंका से जुड़े जंतर-मंतर के कथित अनधिकृत प्रवेश मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों की जमानत रद्द कर नई जमानत पेश करने का निर्देश दिया।
CJP Leaders Case: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रंका और सौरव दास की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं। जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश करने और विरोध प्रदर्शन के आरोप में घिरे इन दोनों नेताओं के केस की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। सूत्रों की मानें तो मामला सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा होने की वजह से इसे स्थानीय पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच के हवाले किया गया है।
CJP Case: क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपी गई जांच?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर कथित अनधिकृत प्रवेश से जुड़े मामले को अब क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया है।
पहले मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी।
अब क्राइम ब्रांच पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
आशुतोष रंका और सौरव दास उन CJP नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था।
CJP Leaders Bail: आशुतोष रंका और सौरव दास की जमानत क्यों रद्द हुई?
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों नेताओं की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें पुलिस हिरासत में ही रखने का आदेश दिया है:
- पुराने वादों का उल्लंघन: अदालत ने पाया कि रंका और दास ने 11 अक्टूबर, 2026 को दिए अपने हलफनामे और आश्वासनों का उल्लंघन किया है। उनके आचरण से इलाके में शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका फिर से पैदा हो गई है।
- अनधिकृत जगहों पर भीड़ जुटाने की आशंका: दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि दोनों नेता जंतर-मंतर जैसी जगहों पर, जो अब धरना प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं है, बार-बार लोगों को उकसाकर अनधिकृत रूप से जमा कर रहे हैं।
- कानून तोड़ने की आदत पर सवाल: मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि बिना अनुमति वाली जगहों पर बार-बार प्रदर्शन बुलाने की इनकी आदत यह दिखाती है कि वे कानून का पालन करने को लेकर गंभीर नहीं हैं।
Delhi Police CJP Case: एहतियाती हिरासत और जमानतदारों पर सवाल
अदालत ने केवल प्रिवेंटिव कस्टडी (एहतियाती हिरासत) की अर्जी पर ही गौर नहीं किया, बल्कि दोनों नेताओं के जमानतदारों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं:
- पहचान दस्तावेजों में गड़बड़ी: आदेश में कहा गया कि रंका और दास द्वारा पेश किए गए जमानतदारों (sureties) के पहचान संबंधी कागजात में कई खामियाँ पाई गईं।
- पहचान साबित करने में नाकाम: जमानतदार अदालत के सामने अपनी संतोषजनक पहचान और बुनियादी विवरण प्रस्तुत करने में नाकाम रहे।
- नई जमानत देने के निर्देश: अदालत ने पुराने जमानतदारों के कागजातों को खारिज करते हुए आरोपियों को नए और वैध जमानतदार पेश करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं और क्राइम ब्रांच पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है।
अब क्राइम ब्रांच की जांच में कथित अनधिकृत प्रवेश और विरोध प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। मामले में पुलिस के आरोपों और मजिस्ट्रेट के आदेश को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।








