Dr Ashok Kumar Mahapatra Death : पद्मश्री से सम्मानित देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन और AIIMS भोपाल के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन हो गया। जिन्होंने 16 घंटे की जटिल सर्जरी से जुड़वां बच्चों जग्गा और कालिया को अलग कर इतिहास रचा था।
भोपाल। देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन और पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का 74 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने सोमवार रात दिल्ली के AIIMS में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। डॉ. महापात्रा AIIMS भोपाल के अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) भी रहे थे। उन्होंने अपने चार दशक से ज्यादा के करियर में चिकित्सा और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
ओडिशा के पुरी में हुआ था जन्म
डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का जन्म 29 दिसंबर 1952 को ओडिशा के पुरी में हुआ था। उन्होंने 1975 में बेरहामपुर के MKCG मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली AIIMS से सर्जरी में MS और न्यूरोसर्जरी में MCh की डिग्री हासिल की। उन्होंने करीब 42 साल तक दिल्ली AIIMS में सेवाएं दीं। इस दौरान वे न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख और न्यूरोसाइंसेज सेंटर के प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
16 घंटे के ऑपरेशन से मिली देश-दुनिया में पहचान
डॉ. महापात्रा को साल 2017 में बड़ी पहचान मिली, जब उन्होंने ओडिशा के जुड़वां बच्चों जग्गा और कालिया को अलग करने वाली मेडिकल टीम का नेतृत्व किया। दोनों बच्चे सिर से जुड़े हुए पैदा हुए थे। यह बेहद जटिल ऑपरेशन था, जो करीब 16 घंटे तक चला। डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक दोनों बच्चों को अलग किया। इस उपलब्धि ने भारतीय चिकित्सा जगत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
AIIMS भुवनेश्वर के पहले निदेशक रहे
डॉ. महापात्रा साल 2006 से 2009 तक लखनऊ के SGPGI के निदेशक रहे। इसके बाद 2012 से 2016 तक AIIMS भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने संस्थान में मेडिकल शिक्षा और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के विकास में अहम भूमिका निभाई। बाद में वे SOA यूनिवर्सिटी के कुलपति भी बने।
पद्मश्री समेत मिले 75 से ज्यादा सम्मान
चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके नाम करीब 870 रिसर्च पेपर, 16 किताबें और 140 से ज्यादा पुस्तक अध्याय दर्ज हैं। उनकी रिसर्च को 26,800 से अधिक साइटेशन मिले। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें करीब 75 पुरस्कार और 17 विशेष व्याख्यान (ओरेशन) भी मिले थे।
परिवार में पत्नी और बेटी
डॉ. अशोक महापात्रा अपने पीछे पत्नी और एक बेटी को छोड़ गए हैं। परिवार से जुड़ी अन्य निजी जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उनके निधन पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी समेत कई नेताओं और चिकित्सा जगत की हस्तियों ने शोक जताया है। उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए भुवनेश्वर ले जाए जाने की जानकारी सामने आई है।






