नेहा बोरा के ब्राह्मणवादी व्यवस्था और मंदिरों पर दिए गए बयान से मचा बवाल। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों पर हिंदू-विरोधी एजेंडे का आरोप लगाया।
Neha Bora Controversy: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) प्रमुख नेहा बोरा के ब्राह्मणवादी व्यवस्था और मंदिरों को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। बीजेपी ने उन पर हिंदू धर्म को बदनाम करने और कांग्रेस के कथित हिंदू-विरोधी प्रचार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है। बोरा ने कहा था कि महिलाओं को 'ब्राह्मणवादी व्यवस्था' से सुरक्षा की जरूरत है और मंदिरों के अंदर पुजारी बलात्कार करते हैं।
नेहा बोरा के साथ ही बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
- बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नेहा बोरा की टिप्पणियों को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों से जोड़ते हुए कहा कि यह सनातन धर्म के खिलाफ वैचारिक अभियान का हिस्सा है।
- प्रदीप भंडारी ने कहा, “ये टिप्पणियां राहुल गांधी से प्रेरित हैं, क्योंकि आपको याद होगा कि राहुल ने कहा था कि मंदिरों के अंदर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की जाती है।”
- दरअसल, 2014 में दिल्ली में एक महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि मंदिरों में देवियों की पूजा करने वाले लोग ही बसों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी करते हैं।
- हाल ही में राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर निशाना साधा था। उन्होंने सोशल मीडिया पर RSS को 'केवल पुरुषों वाला, संविधान-विरोधी पंथ' बताया था।
कांग्रेस पर हिंदू-विरोधी एजेंडे का आरोप
- बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए 'हिंदू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया।
- उन्होंने आरोप लगाया कि नेहा बोरा बांग्लादेश के इस्लामवादियों से प्रेरित हैं और कांग्रेस की विचारधारा भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है।
- उनके मुताबिक, कांग्रेस सनातन धर्म और हिंदू आस्था को निशाना बना रही है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान भी 'हिंदू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' शब्दों को लेकर विवाद हुआ था।
- 2010 से 2013 के बीच तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और सुशील कुमार शिंदे ने बम धमाकों की जांच पर चर्चा के दौरान इन शब्दों का इस्तेमाल किया था।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
- यह नया विवाद तब शुरू हुआ, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया।
- उन्होंने मतदाता सूची से जानबूझकर नाम हटाने और प्रक्रिया में उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा था कि 'वोट की पवित्रता को तार-तार कर दिया गया है।'
- इसके बाद उन्होंने जाति और धार्मिक संस्थानों को लेकर टिप्पणी की। बोरा ने कहा था कि महिलाओं को खास तौर पर 'ब्राह्मणवादी व्यवस्था' से सुरक्षा चाहिए।
- उनके मुताबिक, यह व्यवस्था गरीबों, शोषितों, जानवरों और महिलाओं के साथ दमन और दुर्व्यवहार को सही मानती है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था में ब्राह्मण महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं और मंदिरों के अंदर पुजारी बलात्कार करते हैं।
कठुआ मामले का किया जिक्र
- अपने बयान में नेहा बोरा ने जनवरी 2018 के कठुआ मामले का भी जिक्र किया था। जम्मू-कश्मीर के खानाबदोश बकरवाल समुदाय की 8 साल की बच्ची को गांव के एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था। उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। जून 2019 में विशेष अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराया था। तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिनमें मंदिर का देखभाल करने वाला सांझी राम भी शामिल था।
सोशल मीडिया पर हुई नेहा बोरा की आलोचना
- नेहा बोरा की टिप्पणियों की सोशल मीडिया पर भी आलोचना हुई। इंस्टाग्राम हैंडल 'सनातनिकिड्स' ने कहा कि किसी पूरे समुदाय के खिलाफ इतने गंभीर और व्यापक आरोप लगाना सार्वजनिक चर्चा की भाषा पर सवाल खड़े करता है।
- पोस्ट में कहा गया कि यौन शोषण के मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को महिलाओं के लिए खतरा बताना गलत है।
- समूह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे का इस्तेमाल किसी समुदाय को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।






