जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग पर प्रदर्शन जारी है। चार छात्र भूख हड़ताल पर हैं और कक्षाएं ऑनलाइन हैं।

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी में रविवार को भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। छात्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन के तहत 4 प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। परिसर के अंदर करीब 200 छात्र मौजूद हैं, जबकि परिसर के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इसी बीच, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी जामिया प्रोटेस्ट का समर्थन किया है।

जामिया के सपोर्ट में क्या बोलीं नेहा बोरा?

नेहा बोरा ने X हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, बीजेपी सरकार, दिल्ली पुलिस और जामिया प्रशासन, JMI के संकल्प को तोड़ने के लिए दिन-रात और बेरहमी से काम कर रहे हैं। कल छात्रों पर हमला किया गया और आज ID कार्ड लिए हुए छात्रों को उनके अपने ही कैंपस में घुसने से रोका गया और हिरासत में ले लिया गया। लेकिन JMI के छात्र अडिग हैं! उन्हें सलाम और बधाई! इस पोस्ट के साथ नेहा ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें दिल्ली पुलिस गो बैक के नारे सुनाई दे रहे हैं। वहीं, पुलिस कुछ प्रदर्शनकारियों को हटाती दिख रही है।

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प्रदर्शनकारियों के क्या हैं आरोप?

बता दें कि विश्वविद्यालय के गेट नंबर 7 और आसपास के अन्य गेटों से प्रदर्शन स्थल तक जाने पर रोक लगा दी गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि उन्हें अपने साथ खाना और पानी तक परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस बीच, पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के जरिए बार-बार घोषणा कर रहे हैं कि छात्र विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के फुटपाथों को खाली कर दें। छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब भी जारी है।

जामिया में छात्र संघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग

  • जामिया मिलिया इस्लामिया में यह विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर से शुरू हुआ था। छात्रों की मुख्य मांग विश्वविद्यालय के छात्र संघ यानी 'जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन' (JMISU) को फिर से बहाल करने की है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाने की भी मांग कर रहे हैं।
  • प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वह आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।
  • छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी बात सुनने के बजाय आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रहा है।
  • छात्र संघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। इसी बीच चार छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी है।

जामिया स्टूडेंट्स यूनियन को 2006 में क्यों किया गया था सस्पेंड?

  • जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन को साल 2006 में सस्पेंड कर दिया गया था। उस समय हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में बार-बार बाधा डालने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ को निलंबित कर दिया गया था।
  • अब छात्र संगठन को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए, ताकि छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को संगठित तरीके से प्रशासन के सामने रख सकें।
  • छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब भूख हड़ताल तक पहुंच गया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ छात्रों का गतिरोध भी बना हुआ है।

जामिया में ऑनलाइन हुईं कक्षाएं, लाइब्रेरी और कैंटीन भी बंद

  • विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार को एक नोटिस जारी किया। इसमें घोषणा की गई कि अगली सूचना तक सभी कक्षाएं तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी।
  • इस फैसले के साथ विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, कैंटीन और मुख्य प्रवेश द्वारों को भी बंद कर दिया गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के इस फैसले की आलोचना की है।
  • छात्रों का आरोप है कि ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने और विश्वविद्यालय की सुविधाएं बंद करने का उद्देश्य परिसर को खाली कराना है। उनका कहना है कि प्रशासन इस कदम के जरिए 'गालिब प्रतिमा लॉन' के पास चल रहे आंदोलन को कमजोर करना चाहता है।
  • छात्रों का यह भी दावा है कि प्रशासन के फैसले से उनके लिए परिसर में रहकर पढ़ाई करना और आंदोलन जारी रखना मुश्किल हो गया है।

छात्रों का आरोप- आंदोलन खत्म कराने ऑनलाइन की गईं कक्षाएं

स्टूडेंट मोहम्मद अयान खान ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला छात्रों को परिसर से बाहर निकालने के बहाने के तौर पर लिया है। छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और आंदोलन के दौरान उनकी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, छात्र संघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है।