नेहा बोरा ने 10,000 रुपये के पीस बॉन्ड नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। ‘रिजीम चेंज’ की मांग पर बहस के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।

Neha Bora Peace Bond: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का शांति बॉन्ड भरने के लिए कहा गया था। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करने में कुछ भी गलत नहीं है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि बोरा ऐसी सभा में शामिल थीं, जहां सरकार बदलने की मांग की गई थी।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कहा कि सत्ता परिवर्तन वोटों के जरिए होना चाहिए, न कि नई दिल्ली में जुटे कुछ ‘उपद्रवी तत्वों’ के जरिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस प्रसाद की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कहा कि आदेश शुक्रवार शाम 6 बजे सुनाया जाएगा।

10,000 रुपये के शांति बॉन्ड नोटिस को चुनौती

  • यह याचिका नई दिल्ली जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से 17 अक्टूबर को जारी नोटिस के खिलाफ दायर की गई है। इसी दिन नेहा बोरा को रिहा किया गया था।
  • उन्हें 16 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। नोटिस में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया था।
  • बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन गलत नहीं है। इसके जवाब में चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार बदलने का फैसला चुनाव में वोटों के जरिए होना चाहिए।
  • उन्होंने दावा किया कि नोटिस सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियाती कार्यवाही के तहत जारी किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने 12 उल्लंघनों का दिया हवाला

  • ASG चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी करने से पहले अधिकारियों ने उपलब्ध सामग्री का आकलन किया था।
  • उनके मुताबिक, पुलिस सब-इंस्पेक्टर से मिली जानकारी, पुरानी FIR और मौजूदा हालात पर विचार करने के बाद पूरा रिकॉर्ड मजिस्ट्रेट के सामने रखा गया था।
  • शर्मा ने आरोप लगाया कि बोरा ने बार-बार पाबंदियों का उल्लंघन किया और इसके समर्थन में 12 मामलों का हवाला दिया।
  • पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि बोरा ऐसी सभा में शामिल थीं, जहां ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण के साथ सत्ता परिवर्तन की मांग से जुड़े बयान दिए गए थे।
  • शर्मा ने बोरा के इस दावे का भी विरोध किया कि संबंधित इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं थी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की संख्या कम होने के बावजूद बोरा रोके जाने पर नहीं रुकीं।

नेहा बोरा ने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया

  • वकील अभिक चिमनी के जरिए दायर याचिका में नेहा बोरा ने नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।
  • उनका कहना है कि इसमें शांति भंग होने की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं दिया गया और न ही संबंधित समय, स्थान या घटना का स्पष्ट उल्लेख है।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
  • नेहा के वकील शंकरनारायणन ने कहा कि बोरा 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में CJP के प्रदर्शन में शामिल नहीं थीं, बल्कि मंडी हाउस में अपने अलग प्रदर्शन में थीं।
  • पुलिस के नोटिस में मंडी हाउस में नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के पास बार-बार प्रदर्शन और लोगों को कनॉट प्लेस के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए थे।

मंडी हाउस मार्च और CJP नेताओं की गिरफ्तारी

  • 16 अक्टूबर को नेहा बोरा ने AISA कार्यकर्ताओं के साथ मंडी हाउस से फ्लैग मार्च निकाला था। वे वोटिंग सिस्टम में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थीं।
  • पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और करीब 12 घंटे बाद 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 6 बजे रिहा कर दिया।
  • यह घटनाक्रम CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुआ। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।