Election Commission of India: चुनाव आयोग को लेकर चल रहे सियासी बवाल के बीच संजय राउत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एक वीडियो शेयर किया था। दिल्ली पुलिस ने इसे पुराना बताते हुए फर्जी खबर फैलाने वालों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
Jantar Mantar Protest Video: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच जंतर-मंतर पर कथित बड़े विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो को कुछ यूजर्स ने 26 सितंबर का बताकर साझा किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसे पुराना वीडियो बताया है और कहा है कि यह किसी पिछली घटना की रिकॉर्डिंग है।
दिल्ली पुलिस ने वायरल दावे को बताया गलत
नई दिल्ली के डीसीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर साफ किया कि जंतर-मंतर पर शनिवार को किसी बड़े प्रदर्शन का वायरल दावा सही नहीं है। पुलिस के मुताबिक, शेयर किया जा रहा वीडियो पुराने कार्यक्रम का है। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह वीडियो शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत समेत कई लोगों ने साझा किया था। राउत ने वीडियो को मौजूदा जंतर-मंतर प्रदर्शन से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू होने का दावा किया था। बाद में दिल्ली पुलिस की ओर से वीडियो की तारीख को लेकर स्पष्टीकरण सामने आया।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
वायरल वीडियो का विवाद ऐसे समय सामने आया है जब SIR अभियान को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर राजनीतिक बहस तेज है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और चुनावी आंकड़ों की व्यवस्था समेत कई मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। वहीं, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों में बताए गए मतभेद के आकलन को खारिज करते हुए कहा कि SIR समेत आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।
29 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन
इसी बीच पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की बात कही।
महबूबा मुफ्ती ने SIR के अलावा धार्मिक स्थलों और मतदाता सूची से जुड़े कई आरोप भी लगाए हैं। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इन पर संबंधित पक्षों के बीच मतभेद हैं।
विपक्षी दलों ने भी उठाए SIR के मुद्दे
कांग्रेस के देशव्यापी अभियान के तहत भारतीय युवा कांग्रेस ने भी रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई। वहीं, सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की बात कही है।
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के मुताबिक, SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक होने की संभावना है। उन्होंने इस चर्चा में गठबंधन से बाहर के दलों को भी शामिल करने की बात कही है।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में असहमति या एकतरफा निर्णय के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, SIR के कार्यक्रम और इससे जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत फैसले से संबंधित नहीं था, बल्कि डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला था। ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक आरोपों और आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच विवाद फिलहाल जारी है।
