Delhi Protest Site: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान की बुकिंग का शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये है। दिसंबर में सिर्फ तीन तारीखें उपलब्ध हैं। जानें किराया, मुफ्त प्रदर्शन की सुविधा, बुकिंग नियम और AAP के सवाल।

Delhi Protest Site: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को हटाकर विरोध-प्रदर्शनों के लिए जिन नई जगहों को चुना है, उनमें सबसे प्रमुख रामलीला मैदान को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जंतर-मंतर पर मुफ्त में होने वाले प्रदर्शनों के उलट, अब रामलीला मैदान में आवाज उठाने के लिए भारी-भरकम कीमत चुकानी होगी। यही नहीं, किराए के पैसे देने को तैयार लोगों के लिए भी इस साल मैदान में केवल तीन ही तारीखें बची हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब दिल्ली में आम जनता और संगठनों के लिए विरोध जताना आसान रहेगा?

1.21 लाख का किराया और केवल 3 तारीखें उपलब्ध

दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा 11 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद नई व्यवस्था का गणित समझिए।

  • दिसंबर में सिर्फ 3 दिन खाली: 12 एकड़ में फैले 50,000 क्षमता वाले इस मैदान में अगले ढाई महीनों में सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर की बुकिंग खाली है।
  • एक दिन की जेब ढीली: मैदान का रोज का किराया 50,000 रुपये है। इसके अलावा 55,000 रुपये रिफंडेबल सिक्योरिटी और टैक्स मिलाकर शुरुआती पेमेंट 1.21 लाख रुपये बैठता है।
  • फ्री में सिर्फ 150 लोग: MCD अधिकारियों के मुताबिक एक छोटा हिस्सा मुफ्त उपलब्ध है, पर वहां केवल 150 लोग ही आ सकते हैं।
  • एनओसी का पेच: MCD से बुकिंग मंजूर कराने से पहले दिल्ली पुलिस से एनओसी (NOC) लेना भी अनिवार्य है।

आम आदमी पार्टी के सवाल और जाम का डर

विरोध-प्रदर्शन की इस नई जगह को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और ट्रैफिक की समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

  • सौरभ भारद्वाज का हमला: AAP नेता ने कहा कि मैदान में पहले से रामलीलाएं और त्योहार तय हैं, ऐसे में सरकार का यह कदम जनता के साथ धोखा है।
  • अस्पतालों के पास जाम का खतरा: पास में ही तीन बड़े अस्पताल और MCD हेडक्वार्टर हैं। 2014 की रैली में 4 किमी दूर ITO तक लंबा जाम लग गया था।
  • रूट डायवर्जन का झंझट: भीड़ होने पर आसफ अली रोड को वन-वे करना पड़ता है और जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर भारी दबाव आ जाता है।

तालाब से लेकर ऐतिहासिक रैलियों तक का सफर

रामलीला मैदान का अपना एक राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है।

  • 1930 का तालाब: यह मैदान 1930 तक एक तालाब था, जिसे 1932 में रामलीला मंचन के लिए समतल किया गया।
  • ऐतिहासिक पड़ाव: 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सत्याग्रह, 1962 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का दौरा, 1971 में इंदिरा गांधी की विजय रैली और 1974 में सोवियत नेता ब्रेझनेव का कार्यक्रम यहीं हुआ।
  • आपातकाल और केजरीवाल: 25 जून 1975 को जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने आपातकाल के दिन यहीं विशाल रैली की थी। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने 2013, 2015 और 2020 में यहीं शपथ ली थी।