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Delhi Red Fort Blast: डॉक्टर, प्रोफेसर और मौलवी ने कैसे बुनी साजिश? NIA रिमांड पर उगलेंगे राज़
दिल्ली लाल किला ब्लास्ट केस में क्या कुछ बड़ा खुलासा होने वाला है? तीन डॉक्टरों समेत पांच आरोपियों को NIA ने 3 दिन की हिरासत में लिया है। जांच में व्हाइट-कॉलर आतंकी नेटवर्क, विदेशी हैंडलर्स और फंडिंग लिंक सामने आए हैं।

Delhi Red Fort Blast NIA Custody Case: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के बाहर 10 नवंबर को हुआ धमाका सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि एक ऐसी साजिश थी जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। Delhi Red Fort Blast Case में अब जो नाम सामने आए हैं, वे आम नहीं हैं। इस मामले में डॉक्टर शाहीन, डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर अदील जैसे पढ़े-लिखे लोगों को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्हें और दो अन्य आरोपियों को 3 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है।
कोर्ट ने NIA हिरासत क्यों मंजूर की?
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अदालत से कहा कि इस केस में अभी कई अहम कड़ियां जुड़नी बाकी हैं। धमाके की साजिश, फंडिंग, विदेशी संपर्क और तकनीकी मदद को लेकर गहराई से पूछताछ जरूरी है। कोर्ट ने NIA की दलीलों को सही मानते हुए पांचों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया और 16 जनवरी को दोबारा पेश करने को कहा।
धमाके के दिन दिल्ली में क्या हुआ था?
10 नवंबर को लाल किले के बाहर एक विस्फोटक से भरी i20 कार में जोरदार धमाका हुआ। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। धमाके के बाद राजधानी में दहशत फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था कई गुना बढ़ा दी गई।
i20 कार से कैसे खुला बड़ा राज़?
जांच में पता चला कि धमाके में इस्तेमाल की गई कार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे डॉ. उमर उन नबी से जुड़ी थी। यहीं से जांच एजेंसियों को शक हुआ कि मामला सिर्फ लोकल नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का है।
डॉक्टरों का आतंक से क्या कनेक्शन?
जांच में सामने आया कि डॉ. शाहीन सईद (लखनऊ), डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई (पुलवामा) और डॉ. अदील अहमद राथर (अनंतनाग/सहारनपुर कनेक्शन)- इन तीनों ने कथित तौर पर साजिश रचने, तकनीकी मदद और नेटवर्क बनाने में अहम भूमिका निभाई। इनके साथ मुफ्ती इरफान अहमद वागे और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश भी शामिल बताए गए हैं।
क्या यह व्हाइट-कॉलर आतंकी नेटवर्क है?
NIA और केंद्रीय आतंकवाद निरोधक सेल का मानना है कि यह एक व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल है, जहां पढ़े-लिखे लोग, डॉक्टर और धार्मिक उपदेशक मिलकर आतंक की योजना बना रहे थे। जांच में अफगानिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बैठे विदेशी हैंडलर्स से संपर्क के भी संकेत मिले हैं।
NIA की आगे की क्या है तैयारी?
अब जब आरोपी NIA हिरासत में हैं, तो उम्मीद है कि फंडिंग के स्रोत सामने आएंगे, विदेशी हैंडलर्स की पहचान होगी और दिल्ली ब्लास्ट की पूरी साजिश का नक्शा साफ होगा। यह केस देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया है।
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