सुरक्षा कारणों से DGCA ने भारतीय एयरलाइंस को मिडिल ईस्ट के 9 देशों के एयरस्पेस से बचने की सलाह दी है। सऊदी अरब और ओमान में 32,000 फीट से नीचे उड़ान पर रोक है। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित होंगी।
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात के बीच, भारत की एविएशन रेगुलेटर एजेंसी DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने एक बड़ा कदम उठाया है। DGCA ने भारतीय एयरलाइंस को सुरक्षा के मद्देनजर 9 देशों के एयरस्पेस यानी हवाई रास्ते से बचने की सलाह दी है। यह फैसला सिविलियन विमानों की सुरक्षा को लेकर बढ़े खतरे को देखते हुए लिया गया है। नई एडवाइजरी के मुताबिक, एयरलाइंस से ईरान, इज़राइल, लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हवाई क्षेत्र से उड़ानें न ले जाने को कहा गया है। साथ ही, जो एयरलाइंस इन देशों के एयरपोर्ट्स पर जाती हैं या इनके एयरस्पेस का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें पूरी तैयारी और बैकअप प्लान (Contingency Plans) रखने का भी निर्देश दिया गया है।
हालांकि, सऊदी अरब और ओमान के एयरस्पेस के इस्तेमाल की इजाजत है, लेकिन इसके लिए भी DGCA ने एक शर्त रखी है। इन देशों के ऊपर से उड़ान भरते समय विमानों को 32,000 फीट (FL 320) से नीचे उड़ने की सख्त मनाही है। यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि सैन्य अभियानों वाले इलाकों में सिविलियन विमानों को गलती से निशाना न बनाया जा सके। DGCA के इस नए नियम का भारत से जाने वाली इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर बड़ा असर पड़ेगा। खाड़ी देशों, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को अब दूसरे लंबे और सुरक्षित रास्तों से जाना होगा। इससे सफर का समय बढ़ने और हवाई टिकटों के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है। फिलहाल यह निर्देश 28 मार्च तक के लिए जारी किया गया है। DGCA ने कहा है कि हालात की समीक्षा के बाद इस पर आगे फैसला लिया जाएगा।
