पोलियो से जूझते भारत कुमार और आग हादसे की शिकार हसीना-क्या यह मिलन किस्मत या चमत्कार है? समाज की अस्वीकृति के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे को क्यों चुना, क्या छिपा है इस रिश्ते में? दिव्यांगता के बावजूद विवाह की राह आसान कैसे बनी, क्या सोच बदल रही है समाज की? सामूहिक विवाह समारोह में बंधने जा रहे इस जोड़े की कहानी में अगला मोड़ क्या होगा?

Udaipur Disabled Love Story: राजस्थान के उदयपुर जिले के फालासिया क्षेत्र के एक छोटे से गांव से संघर्ष और जज्बे की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने समाज की संकीर्ण सोच पर करारा तमाचा जड़ा है। गांव के शांत माहौल में जन्मे भारत कुमार आहारी की जिंदगी बचपन में ही बदल गई जब वे पोलियो की चपेट में आ गए। रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता और चलने-फिरने की लाचारी ने उनके हर दिन को एक परीक्षा बना दिया। वहीं दूसरी तरफ, फालासिया की ही रहने वाली हसीना कुमारी भोगोरा की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं थी। एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी हसीना ने बचपन में ही अपनी मां को खो दिया। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब एक भयानक आग दुर्घटना में उनका चेहरा और हाथ गंभीर रूप से झुलस गए, जिससे उनका एक हाथ हमेशा के लिए बेअसर हो गया।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

"इससे कौन शादी करेगा?"…जब समाज के तानों ने छलनी किया दिल

भारत कुमार ने तमाम मुश्किलों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी हिम्मत नहीं हारी और अपनी स्नातक (Graduation) की शिक्षा पूरी की। लेकिन जैसे ही वे बड़े हुए, जीवन की सबसे कड़वी और दर्दनाक चुनौती बनकर सामने आया हमारा समाज। जब भी भारत के विवाह की बात उठती, लोग हमदर्दी दिखाने के बजाय तीखे बाण छोड़ते। समाज के लोग अक्सर पीठ पीछे या सामने कह देते, “वह तो खुद दिव्यांग है, उससे कौन शादी करेगा? वह किसी और की जिम्मेदारी कैसे उठाएगा?” ये बातें भारत के आत्मसम्मान को अंदर तक तोड़ देती थीं और वे अक्सर अकेलेपन के अंधेरे में डूब जाते थे।

दो अधूरे ख्वाब, एक मुकम्मल दास्तान: जब आपस में मिले दो जख्मी दिल

कहते हैं कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं और वक्त आने पर रास्ते खुद-ब-खुद मिल जाते हैं। तानों और अकेलेपन से जूझ रहे भारत की जिंदगी में अचानक हसीना कुमारी की एंट्री हुई। दोनों ने जब एक-दूसरे से अपनी आपबीती साझा की, तो उन्हें अहसास हुआ कि उनका दर्द एक जैसा है। हसीना के झुलसे हुए चेहरे और प्रभावित हाथ के पीछे भारत को एक बेहद खूबसूरत और मजबूत दिल दिखाई दिया, वहीं हसीना ने भारत की शारीरिक अक्षमता के पार उनके फौलादी हौसले को देखा। यह रिश्ता किसी मजबूरी या सहानुभूति पर नहीं, बल्कि बराबरी के सम्मान और गहरी समझ की नींव पर खड़ा हुआ।

6 और 7 जून को दिल्ली में महा-मिलन: नारायण सेवा संस्थान रचेगा इतिहास!

अब इन दोनों की जिंदगी का सबसे बड़ा और खूबसूरत सस्पेंस खुलने जा रहा है। समाज को अपनी ताकत का अहसास कराने के लिए यह जोड़ा पूरी तरह तैयार है। भारत कुमार आहारी और हसीना कुमारी भोगोरा आने वाली 6 और 7 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्ली में एक नए सफर की शुरुआत करेंगे। वे नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 46वें “दिव्यांग एवं आर्थिक रूप से कमजोर जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह” में सात फेरे लेकर हमेशा-किए के लिए एक-दूसरे के हो जाएंगे।

बाहरी खूबसूरती नहीं, दिलों का जुड़ना है असली 'सच्चा साथ'

नारायण सेवा संस्थान का यह मंच सिर्फ दो लोगों की शादी का गवाह नहीं बनेगा, बल्कि दुनिया के सामने यह संदेश देगा कि सच्चा प्रेम और साथ शारीरिक बनावट या बाहरी परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता। जिन्होंने कभी समाज की नजरों में खुद को कमजोर पाया था, आज वही अपनी अटूट मोहब्बत और हौसले से एक नई और प्रेरणादायक कहानी लिखने जा रहे हैं। भारत और हसीना का यह विवाह उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो अपनी कमियों को ही अपनी किस्मत मान बैठते हैं।