डी.के. शिवकुमार दिल्ली किस मकसद से पहुंचे थे? फ्लाइट में डी.के. शिवकुमार की कौन सी तस्वीर चर्चा का विषय बन गई? सूत्रों के मुताबिक, डी.के. शिवकुमार अपनी कैबिनेट में किन नेताओं को प्राथमिकता देना चाहते हैं?
बेंगलुरु/दिल्ली: कर्नाटक की सियासत का सारा एक्शन अब दिल्ली शिफ्ट हो गया है। राज्य में कैबिनेट बनाने की कवायद आखिरी दौर में है। इसी सिलसिले में डिप्टी सीएम और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार हाईकमान से मिलने के लिए अपनी एक खास लिस्ट के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। लेकिन इस सफर के दौरान एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है।

फ्लाइट में ही तैयार हुई मंत्रियों की लिस्ट!
डी.के. शिवकुमार की एक एक्सक्लूसिव तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह दिल्ली जा रही फ्लाइट में बैठे-बैठे ही अपने करीबी विधायकों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। डीके ने सफर के समय का भी पूरा इस्तेमाल किया और बहुत ही गोपनीय तरीके से मंत्री बनने वाले नामों को फाइनल किया। यह तस्वीर अब राजनीतिक गलियारों में खूब हलचल मचा रही है।
डीके की टीम में सिर्फ अपने लोग?
माना जा रहा है कि आने वाली सरकार में अपना दबदबा कायम रखने के लिए डी.के. शिवकुमार अपने सबसे भरोसेमंद लोगों को कैबिनेट में जगह दिलाना चाहते हैं। उनकी कैबिनेट में कौन-कौन होगा, किसे कौन सा विभाग मिलेगा, इसका पूरा खाका डीके ने तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस लिस्ट में पुराने मैसूर इलाके के नेताओं और 'कनकपुरा की चट्टान' कहे जाने वाले डीके के वफादारों को ज्यादा तवज्जो दी गई है।
गेंद अब हाईकमान के पाले में
दिल्ली पहुंचकर डी.के. शिवकुमार ने AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं से मुलाकात की है। उन्होंने अपनी यह 'स्पेशल लिस्ट' हाईकमान के सामने रखकर चर्चा की है। अगर हाईकमान इस लिस्ट पर हरी झंडी दे देता है, तो संभव है कि मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।
सिद्धारमैया बनाम डी.के. शिवकुमार?
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पास भी अपने संभावित मंत्रियों की एक अलग लिस्ट है। ऐसे में, सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच अपने-अपने समर्थकों को मंत्री पद दिलाने की होड़ मची है। अब देखना यह है कि इस रेस में किसकी जीत होती है। दिल्ली में हो रही इस हाई-वोल्टेज मीटिंग के बाद ही साफ होगा कि किसका पलड़ा भारी रहता है। कुल मिलाकर, फ्लाइट में मंत्रियों की लिस्ट बनाने का डी.के. शिवकुमार का यह अंदाज साफ बताता है कि वह सत्ता के बंटवारे में कोई भी समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
