G7 समिट में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल का अस्तित्व सिर्फ़ उनकी वजह से है। यह बयान नेतन्याहू के साथ लेबनान हमलों और ईरान के साथ अमेरिकी शांति समझौते पर मतभेदों के बीच आया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ़ अपने कड़े कदमों का हवाला दिया।
फ्रांस में G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इज़रायल का अस्तित्व सिर्फ़ उनकी वजह से है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ चल रहे मतभेदों के बीच ट्रंप का यह बयान आया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और वो (ट्रंप) न होते, तो इज़रायल दुनिया के नक्शे से ही मिट गया होता। ट्रंप ने यह बात क़तर के अमीर के साथ मुलाकात के बाद कही।

दरअसल, अमेरिका और ईरान इस हफ़्ते एक शांति समझौते पर दस्तखत करने वाले हैं। इससे पहले ट्रंप ने इज़रायल से लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हो रही बमबारी रोकने को कहा था। इसी बात को लेकर दोनों नेताओं के बीच गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं।
ट्रंप ने कहा, "अगर अमेरिका न होता, तो इज़रायल होता ही नहीं। अगर मैं न होता, तो इज़रायल नहीं होता। क्योंकि किसी और राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ़ इतने कड़े कदम उठाने की हिम्मत नहीं की, जितने मैंने किए। ईरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब था। अगर अमेरिका दखल नहीं देता, तो वो इसका इस्तेमाल इज़रायल के खिलाफ़ करते।"
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू के साथ उनके निजी रिश्ते बहुत अच्छे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में हमलों के मामले में नेतन्याहू को ज़्यादा ज़िम्मेदारी दिखानी चाहिए। ट्रंप ने लेबनान में इज़रायल के लंबे समय से चल रहे हमलों और आम लोगों की मौत पर भी नाखुशी जताई। उन्होंने याद दिलाया कि एक हिज़्बुल्लाह लड़ाके को ढूंढने के लिए आम लोगों के रहने वाले पूरे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स को तबाह करने की ज़रूरत नहीं है। ट्रंप ने एक अलग ही सुझाव देते हुए कहा कि अगर इज़रायल हिज़्बुल्लाह से नहीं निपट पा रहा है, तो यह काम सीरिया को सौंप देना चाहिए।
दूसरी ओर, क़तर के अमीर ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे खाड़ी क्षेत्र में अच्छे बदलाव आएंगे। हालांकि, ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत से नेतन्याहू और इज़रायली सरकार बेहद नाराज़ हैं।
