Milk Village Kashmir: कश्मीर के बारामूला जिले का डूडरन गांव इन दिनों काफी चर्चा में है। यहां के लोग 'दौद खोत' (Doud Khots) नाम के देसी फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं। बिना बिजली के चलने वाले इस नेचुरल फ्रिज में दूध और डेयरी प्रोडक्ट एकदम फ्रेश रहते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है।
Dudran village Baramulla: कश्मीर का एक छोटा सा गांव इन दिनों इंटरनेट पर छाया हुआ है। वजह है यहां की एक पुरानी परंपरा, जिसमें लोग बिना मॉडर्न फ्रिज के ही दूध को फ्रेश रखते हैं। हम बात कर रहे हैं नॉर्थ कश्मीर के बारामूला जिले के बोनियार इलाके में बसे डूडरन (Dudran) गांव की। इसे 'मिल्क विलेज' (Milk Village) भी कहा जाता है। पीढ़ियों से यहां के लोगों की रोजी-रोटी डेयरी फार्मिंग और दूध से बने प्रोडक्ट्स पर ही टिकी है।
यहां के लोग बिजली वाले फ्रिज का इस्तेमाल नहीं करते। इसकी जगह वे 'दौद खोत' (Doud Khots) नाम के पारंपरिक स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं, जो बिल्कुल एक नेचुरल फ्रिज की तरह काम करता है। पत्थर और लकड़ी से बनी ये छोटी गुफानुमा जगहें अक्सर प्राकृतिक झरनों के पास बनाई जाती हैं। इससे वहां का माहौल ठंडा रहता है और दूध या जल्दी खराब होने वाले डेयरी प्रोडक्ट्स लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर @ramandeep_onelife ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसके बाद से यह अनोखा तरीका फिर से सुर्खियों में आ गया है। वीडियो में टूरिस्ट्स इस गांव को एक्सप्लोर करते और दूध को सुरक्षित रखने के इस देसी तरीके को समझते नजर आ रहे हैं।
कैसे काम करता है डूडरन का यह नेचुरल फ्रिज?
वीडियो में नजर आ रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पारंपरिक स्ट्रक्चर्स में दूध को कई दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। बाद में इसी दूध से दही, पनीर और घी जैसी चीजें तैयार की जाती हैं।
डूडरन की इस पुरानी तकनीक को लेकर कई रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं। इनके मुताबिक, 'दौद खोत' बिजली के बजाय झरनों के आसपास की प्राकृतिक ठंडक का इस्तेमाल करते हैं। गांव वाले पीढ़ियों से डेयरी प्रोडक्ट्स और जल्दी खराब होने वाले खाने-पीने के सामान को बचाने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
पत्थर और लकड़ी से बने इन स्ट्रक्चर्स के चारों तरफ फेंसिंग (बाड़) भी लगाई जाती है। इनका डिजाइन ऐसा है कि अंदर रखा खाना गर्मी और जानवरों से बचा रहता है, और प्राकृतिक ठंडक का पूरा फायदा मिलता है।
डूडरन को क्यों कहते हैं 'मिल्क विलेज'
डूडरन गांव बोनियार से करीब 14 किलोमीटर दूर है। यह नॉर्थ कश्मीर में बारामूला और उरी के बीच बसा है। इस गांव का डेयरी फार्मिंग से बहुत पुराना नाता है। यहां के परिवार दूध, दही, मक्खन, पनीर और बाकी डेयरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन करते हैं।
गांव की यह पारंपरिक डेयरी प्रैक्टिस पीढ़ियों से चली आ रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि डूडरन में दर्जनों ऐसे परिवार रहते हैं, जिनकी जिंदगी आज भी पूरी तरह से डेयरी फार्मिंग और इससे जुड़े कामों पर निर्भर है।
साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, डूडरन में 133 घर हैं और यहां की कुल आबादी 1,026 है।
कश्मीर में जीने का एक पारंपरिक तरीका
अपनी डेयरी प्रैक्टिस के अलावा, डूडरन इस बात का भी एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे ग्रामीण कश्मीर के कुछ हिस्सों में आज भी पारंपरिक ज्ञान रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। गांव का यह नेचुरल फ्रिज सिस्टम लोगों को मॉडर्न मशीनों पर निर्भर हुए बिना, वहां के मौसम और भौगोलिक स्थिति का सही इस्तेमाल करना सिखाता है।
बिना बिजली खर्च किए खाने को सुरक्षित रखने का यह तरीका लोगों को काफी पसंद आ रहा है। स्थानीय परिवारों के लिए 'दौद खोत' आज भी बहुत काम की चीज है।
सोशल मीडिया का रिएक्शन
सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान भी इस वीडियो ने अपनी तरफ खींचा है। डूडरन में दूध को सुरक्षित रखने का यह पारंपरिक तरीका देखकर कई लोग हैरान हैं।
एक यूजर ने कमेंट किया: "Wowwww amazing" (वाओ अमेजिंग)
वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा: "Amazing" (अमेजिंग)
इस वीडियो ने डूडरन के अनोखे लाइफस्टाइल और पारंपरिक डेयरी प्रैक्टिस को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। इससे कश्मीर की ग्रामीण विरासत के उस पहलू को भी पहचान मिली है, जिसके बारे में लोग कम ही जानते थे।
