एक वायरल वीडियो के अनुसार, अमेरिकी कंपनी 'ह्यूमन माइक्रोब्स' मेडिकल रिसर्च के लिए मल दान करने पर पैसे दे रही है। स्वस्थ डोनर सालाना ₹1.5 करोड़ तक कमा सकते हैं। इस मल का उपयोग बीमारियों के इलाज हेतु फीकल ट्रांसप्लांट में होता है। 

ऑनलाइन दुनिया में पैसा कमाने के अजब-गजब तरीकों पर अक्सर चर्चा होती रहती है। लेकिन हाल ही में एक महिला का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जो इंसानी सेहत और मेडिकल रिसर्च के बीच एक हैरान करने वाले कनेक्शन को दिखाता है। इस वीडियो में दावा किया गया है कि कुछ कंपनियां एक ऐसी चीज खरीदने को तैयार हैं, जिसे बेचने के बारे में शायद ही कोई सोचता हो - और वो है आपका मल (Poop)।

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मल बेचकर बनें करोड़पति?

इस वीडियो का दावा सुनकर कई लोग हैरान रह गए, तो कईयों को इसमें दिलचस्पी भी हुई। कुछ ने इसे मजाक समझा, तो कुछ लोग इसके पीछे की साइंस को जानने के लिए उत्सुक हो गए। वीडियो की शुरुआत में महिला पूछती है, "अगर मैं कहूं कि आप अपनी पॉटी बेचकर 1.5 करोड़ रुपये कमा सकते हैं, तो क्या आप यकीन करेंगे?" इसके बाद वह बताती है कि अमेरिका की एक कंपनी मल दान करने वालों को पैसे देने को तैयार है। उनके दावे के मुताबिक, हर बार मल दान करने पर 41,000 रुपये तक मिल सकते हैं। अगर कोई लगातार ऐसा करता है, तो वह साल में करीब 1.5 करोड़ रुपये तक कमा सकता है।

"पैसे कमाएं, जान बचाएं"

महिला ने वीडियो में उस अमेरिकी कंपनी की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट भी दिखाया है, जिस पर लिखा है, "पैसे कमाएं, जान बचाएं। रिसर्च के लिए एक स्टूल डोनर (मल दाता) बनें।" महिला यह भी दावा करती है कि जो लोग बहुत फिट और हेल्दी हैं, उन्हें इससे भी ज्यादा पैसे मिल सकते हैं। वह जोर देकर कहती है कि यह कोई मजाक नहीं है।

मल से दवा तक का सफर

  • महिला ने मल दान के पीछे की साइंस भी समझाई। वह कहती है, "इसके पीछे का विज्ञान यह है: आपके मल का लगभग आधा हिस्सा आंत के बैक्टीरिया होते हैं। ये पाचन से लेकर मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य तक में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।" ये कंपनियां हेल्दी लोगों के मल से इन अच्छे बैक्टीरिया को निकालकर, उन्हें कैप्सूल में बदलती हैं। फिर इन कैप्सूल्स को उन लोगों को दिया जाता है जो मोटापा, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस प्रोसेस को 'फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट' (FMT) कहा जाता है और इसके कई सफल मामले भी सामने आए हैं। वीडियो के अंत में वह कहती है कि यह साइंस के लिए एक बहुत ही दिलचस्प दौर है।
  • 8 मार्च को शेयर किया गया यह वीडियो क्लिप अब तक चार लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। इस पर यूजर्स के बीच मजेदार बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने हैरानी जताई, तो कुछ ने मजेदार कमेंट्स किए। एक यूजर ने लिखा, "बस यही देखना बाकी रह गया था।" एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "हे भगवान, यह वीडियो मेरे सामने इतनी देर से क्यों आया।"

क्या है 'ह्यूमन माइक्रोब्स'?

इस प्रोजेक्ट के पीछे 'ह्यूमन माइक्रोब्स' (Human Microbes) नाम का संगठन है, जिसे 2020 में माइकल हैरोप (Michael Harrop) ने शुरू किया था। यह मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा में काम करता है, लेकिन दूसरे देशों से भी मल दान स्वीकार करता है। जब संभव होता है, तो वे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की व्यवस्था भी करते हैं।

क्या है कंपनी का फोकस

  • लकंपनी का फोकस ऐसे बेहद स्वस्थ डोनर्स को ढूंढना है, जिनका मल मेडिकल इलाज और रिसर्च में मदद कर सके। हैरोप ने यह प्रोजेक्ट अपनी खुद की स्वास्थ्य समस्याओं और समाज में बड़ी संख्या में लोगों को खराब स्वास्थ्य से जूझते देखने के बाद शुरू किया था।
  • उन्होंने माइक्रोबायोम (microbiome) और फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (FMT) पर कई आर्टिकल लिखे हैं। इसके अलावा, उन्होंने 'HumanMicrobiome।info' नाम से एक बड़ा ऑनलाइन डेटाबेस भी बनाया है, जो माइक्रोबायोम पर हुई रिसर्च को इकट्ठा करता है और उसे एक्सपर्ट्स और आम पाठकों के लिए आसान भाषा में समझाता है। 

वीडियो में सुनिए पूरी कहानी

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