अस्पताल में घंटों मां के शव के पास बैठा रहा मासूम, एटा की कहानी रुला देगी
एटा से सामने आई एक दिल तोड़ देने वाली घटना ने इंसानियत को झकझोर दिया। टीबी और एचआईवी से पीड़ित मां की मौत के बाद 10 साल का बच्चा अकेले शव के साथ जिला अस्पताल पोस्टमार्टम कराने पहुंचा। पिता पहले ही गुजर चुके थे, रिश्तेदारों ने दूरी बना ली थी।

मां की लाश के साथ अकेला पहुंचा 10 साल का बेटा, बीमारी से नहीं, तन्हाई से हार गई जिंदगी
उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आई यह घटना किसी खबर से ज्यादा एक सवाल है—कि क्या बीमारी से ज्यादा खतरनाक समाज की बेरुखी हो सकती है? जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस तक अपनी मां के शव के साथ अकेले पहुंचा 10 साल का बच्चा सिर्फ एक बेटा नहीं था, वह उस सिस्टम का आईना था, जहां रिश्ते, पड़ोस और जिम्मेदारियां सब पीछे छूट गईं।
जानकारी के मुताबिक, 52 वर्षीय महिला लंबे समय से टीबी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। उनका इलाज एटा के वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। बुधवार, 14 जनवरी की रात इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मां के इलाज से लेकर अस्पताल तक हर जिम्मेदारी उसका 10 साल का बेटा ही निभा रहा था।
मौत के बाद भी नहीं मिला कोई अपना
मां की मौत के बाद बच्चा अस्पताल में ही उनके शव के पास घंटों बैठा रहा। वह लगातार किसी परिचित के आने का इंतजार करता रहा, रोता रहा, लेकिन न कोई रिश्तेदार पहुंचा और न ही कोई पड़ोसी। उस वक्त नन्ही आंखों में सिर्फ आंसू नहीं थे, बल्कि एक डर था, अब आगे क्या होगा।
बच्चे ने पुलिस को बताया कि पिछले साल उसके पिता की भी एड्स के कारण मौत हो चुकी है। पिता के निधन के बाद रिश्तेदारों ने घर आना-जाना बंद कर दिया। इसी वजह से उसकी पढ़ाई भी छूट गई। तब से वह अकेले ही अपनी मां की देखभाल कर रहा था। मां की मौत की खबर तक उसने अपने चाचा को नहीं दे पाई थी।
मां का साथ छोड़ने को तैयार नहीं था बच्चा
जब अस्पताल कर्मचारियों ने मदद की पेशकश की और शव को स्ट्रेचर पर रखकर पोस्टमार्टम हाउस ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब भी बच्चा अपनी मां का हाथ छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। पोस्टमार्टम के दौरान भी वह लगातार शव के पास खड़ा रहा। बाद में जब खबर फैलने पर कासगंज से उसके चाचा अस्पताल पहुंचे, तब जाकर बच्चा थोड़ा संभल पाया।
कानपुर से फर्रुखाबाद तक चला इलाज
बच्चे ने बताया कि मां का इलाज पहले कानपुर और फिर फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल में भी कराया गया था। लेकिन हालत में सुधार की बजाय गिरावट आती गई। आखिरकार एटा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ के अनुसार, महिला का 2017 में टीबी का इलाज सफलतापूर्वक हो चुका था। अब यह जांच की जा रही है कि एचआईवी की पुष्टि के बाद महिला को तय मानकों के अनुसार इलाज और सुविधाएं मिलीं या नहीं।
महज 8 साल का एक बच्चा, जो खुद अभी मां की गोद में होना चाहिए था, अपनी मां का पोस्टमॉर्टम करवा रहा था। कफन में लिपटी मां की लाश के पास वह देर तक बैठा बिलखता रहा। कभी नन्हीं आंखें मां के चेहरे को ढूंढतीं, कभी कांपते हाथों से अपने आंसू पोंछता। उसकी सिसकियों में ऐसा सन्नाटा था, जो… pic.twitter.com/tvLXru47Ot
— Bhadohi Wallah (@Mithileshdhar) January 16, 2026
समाज के लिए एक कठोर सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के उस चेहरे को दिखाती है, जहां बीमारी के नाम पर लोग दूरी बना लेते हैं। एक 10 साल का बच्चा जब अपनी मां के शव के साथ अकेला खड़ा मिलता है, तो सवाल सिर्फ सिस्टम पर नहीं, हम सब पर खड़ा होता है।
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